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यूपी में धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत अब तक दर्ज हुए 835 केस, 1682 लोग हुए गिरफ्तार

By राजेंद्र कुमार | Updated: August 9, 2024 19:06 IST

इस कानून तहत दर्ज मामलों में से 818 केस में चार्जशीट फाइल कर दी गई है, जबकि 17 मामलों में अभी जांच चल रही हैं। प्रशांत कुमार का कहना है कि लालच, धमकी या अन्य किसी तरीके से धर्मांतरण के लिए प्रेरित करने वालों को सख्त कार्रवाई की जा रही है। 

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ठळक मुद्देबीते चार वर्षों से भीतर इस कानून के तहत अब तक 835 केस दर्ज किए गए हैंकानून के तहत बीती 31 जुलाई तक 1682 लोगों को गिरफ्तार किया गया हैइस कानून के आने के बाद से राज्य में अवैध धार्मिक धर्मांतरण कराने मामलों में कमी आई है

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण विरोधी कानून तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है। बीते चार वर्षों से भीतर इस कानून के तहत अब तक 835 केस दर्ज किए गए हैं, और इस कानून के तहत बीती 31 जुलाई तक 1682 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) प्रशांत कुमार का दावा है कि इस कानून के आने के बाद से राज्य में अवैध धार्मिक धर्मांतरण कराने मामलों में कमी आई है। इस कानून तहत दर्ज मामलों में से 818 केस में चार्जशीट फाइल कर दी गई है, जबकि 17 मामलों में अभी जांच चल रही हैं। प्रशांत कुमार का कहना है कि लालच, धमकी या अन्य किसी तरीके से धर्मांतरण के लिए प्रेरित करने वालों को सख्त कार्रवाई की जा रही है। 

प्रदेश पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, राज्य में अवैध धार्मिक धर्मांतरण दर्ज किए गए 835 मामलों में सबसे अधिक केस गाजियाबाद, अम्बेडकरनगर, भदोही, सहारनपुर, शाहजहांपुर में सामने आए हैं। 124 लोगों को धर्मांतरण में कोई भूमिका नहीं पाए जाने के बाद जाने दिया गया है। दर्ज हुए मामलों में  70 लोगों ने कोर्ट में सरेंडर किया, जबकि 2708 लोगों को नामित कर उन्हे चेतावनी दी गई है।

इस कानून के तहत लखनऊ में एक मुस्लिम महिला ने गत 6 जुलाई को अपने पति के खिलाफ लव जिहाद का केस दर्ज कराया था। इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई की है। इसी प्रकार ब्राजील के पर्यटकों को ईसाई धर्म में जबरन परिवर्तन कराए जाने के आरोप में सीतापुर में पुलिस ने कार्यवाही की है। वहीं प्रयागराज के एक कॉलेज में भी वीसी सहित 8 लोगों के खिलाफ कार्यवाही की गई है।

चार साल पहले आया था कानून 

सूबे की योगी सरकार ने चार वर्ष पूर्व नवंबर 2020 में जबरन धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए एक अध्यादेश जारी किया गया था। विधानसभा के दोनों सदनों द्वारा इस अध्यादेश के तहत लाए गए विधेयक को पारित किए जाने के बाद, उत्तर प्रदेश गैरकानूनी धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 लागू हुआ था।

विधानसभा से पारित हुए इस कानून को और सख्त बनाने के लिए बीते विधानसभा सत्र के दौरान योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश गैरकानूनी धर्म परिवर्तन प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक, 2024 पारित किया। डीजीपी प्रशांत कुमार के अनुसार अब इस नए कानून के तहत सूबे में जबरन धर्मांतरण पर रोक लगाने का प्रयास किया जाएगा।

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