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जम्मू-कश्मीरः श्रीनगर और कुपवाड़ा में तीन ‘महत्वपूर्ण व्यापारियों’ के यहां छापा, आयकर विभाग ने कहा-करचोरी के आरोप

By भाषा | Updated: September 3, 2020 14:35 IST

बयान में यह नहीं बताया कि किन लोगों के यहां छापा डाला गया लेकिन आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि हिलाल अहमद, गुलाम रसूल माग्रे और इशफाक डार के यहां छापा मारा गया।

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ठळक मुद्देकुछ मामलों में इन व्यापारियों ने आय के बावजूद आयकर रिटर्न फाइल नहीं किया जबकि कुछ मामलों में रिटर्न में विसंगतियां थीं। नियंत्रण रेखा पार व्यापार से संबंधित अभियोजन योग्य दस्तावेज सीमापार व्यापार के संरक्षक से जब्त किये गये है जो बड़े पैमाने पर कर चोरी को दर्शाते हैं।आईटी रिटर्न फाइल नहीं किया। उसमें कहा गया है, ‘‘यह भी पाया गया कि उसके पास दो स्थायी एकाउंट नंबर (पैन) कार्ड हैं।’’

नई दिल्लीः आयकर विभाग ने पाकिस्तान के साथ पिछले साल ही बंद हुए सीमापार व्यापार से जुड़ी करचोरी के आरोप में जम्मू कश्मीर के श्रीनगर और कुपवाड़ा जिलों में तीन ‘महत्वपूर्ण व्यापारियों’ के यहां छापा मारा। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने एक बयान में कहा, ‘‘ इन अभियानों से प्रथम दृष्टया इन तीनों द्वारा अर्जित की कई अघोषित आय, बिना लेखा-जोखा वाली संपत्तियां एवं अभियोजन योग्य साक्ष्य तथा बेनामी लेन-देन में संलिप्तता सामने आयी है।’’ वैसे बयान में यह नहीं बताया कि किन लोगों के यहां छापा डाला गया लेकिन आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि हिलाल अहमद, गुलाम रसूल माग्रे और इशफाक डार के यहां छापा मारा गया।

आयकर विभाग के लिए नीतियां बनाने वाले सीबीडीटी ने कहा कि उसने पाया कि कुछ मामलों में इन व्यापारियों ने आय के बावजूद आयकर रिटर्न फाइल नहीं किया जबकि कुछ मामलों में रिटर्न में विसंगतियां थीं। उसने कहा कि नियंत्रण रेखा पार व्यापार से संबंधित अभियोजन योग्य दस्तावेज सीमापार व्यापार के संरक्षक से जब्त किये गये है जो बड़े पैमाने पर कर चोरी को दर्शाते हैं।

बयान में कहा गया है, ‘‘ तलाशी से खुलासा हुआ कि इन समूहों में से एक का एक अहम व्यक्ति वैसे तो अप्रैल, 2019 में सरकार द्वारा व्यापार निलंबित किये जानेतक सीमापार व्यापार में लगा था लेकिन उसने आईटी रिटर्न फाइल नहीं किया।’’ उसमें कहा गया है, ‘‘यह भी पाया गया कि उसके पास दो स्थायी एकाउंट नंबर (पैन) कार्ड हैं।’’

सीबीडीटी ने आरोप लगाया कि उसकी कंपनी ने पिछले कुछ सालों में 25 करोड़ रुपये का निर्यात किया लेकिन कोई भी आयकर नहीं जमा किया गया। उसने कहा, ‘‘ पाकिस्तान में उसकी बेटी के पढ़ने पर अविदित व्यय का सबूत है।’’ उसने कहा कि दूसर मामले में व्यापारी ने पिछले दो सालों में तीन करोड़ रुपये का निर्यात किया लेकिन उसने एक भी साल के लिए आयकर भी भरा और वह भी बहुत कम राशि की रसीद दिखायी। इसी तरह तीसरे मामले में भी विसंगति है। 

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