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आतंकी कमांडर बेटे की मौत,  48 वर्षीय बाप भी शामिल हुआ गुट में, जानिए मामला

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: July 28, 2020 17:20 IST

पुलिस भी कहती है कि अब्दुल हमीद जैशे मुहम्मद में शामिल हो चुका है। उसका साला भी आतंकी कमांडर था। और वह पिछले महीने हुई मुठभेड़ में मारा गया था जबकि अब्दुल हमीद का बेटा आदिल चौपान 2017 के नवम्बर में हुई एक मुठभेड़ में मार गिराया गया था।

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ठळक मुद्देअब्दुल हमीन के घर वालों के मुताबिक, 19 जुलाई से ही अब्दुल हमीद उस समय से लापता है जब वह अपने खेतों को पानी देने के लिए निकला था।वम्बर 2017 में हुई उसकी मौत के बाद ही ऐसा कदम उठा लेना चाहिए था। उसने इतने सालों के बाद ऐसा क्यों किया, यह जरूर जांच का विषय था।कश्मीर में फैले आतंकवाद के इतिहास में यह मामला पहला है जिसमें इतनी उम्र के व्यक्ति ने आतंकी बनने का फैसला किया हो

जम्मूः दक्षिण कश्मीर का रहने वाले 48 वर्षीय अब्दुल हमीद चौपान को कश्मीर का सबसे अधिक उम्र का रंगरूट आतंकी कहा जा सकता है जो कुछ दिन पहले ही आतंकी गुट में शामिल हुआ है। वह हिज्बुल मुजाहिदीन के मारे गए कमांडर आदिल चौपान का बाप है। कश्मीर में फैले आतंकवाद के इतिहास में यह शायद पहला मौका है जिसमें आतंकी बेटे की मौत के बाद कोई बाप आतंकी बना हो।

अभी तक यही होता आया था कि नौजवान युवा ही आतंक की राह चले थे। पुलिस भी कहती है कि अब्दुल हमीद जैशे मुहम्मद में शामिल हो चुका है। उसका साला भी आतंकी कमांडर था। और वह पिछले महीने हुई मुठभेड़ में मारा गया था जबकि अब्दुल हमीद का बेटा आदिल चौपान 2017 के नवम्बर में हुई एक मुठभेड़ में मार गिराया गया था।

अब्दुल हमीन के घर वालों के मुताबिक, 19 जुलाई से ही अब्दुल हमीद उस समय से लापता है जब वह अपने खेतों को पानी देने के लिए निकला था। उसका फोन भी बंद है। रोचक तथ्य अब्दुल की गुमशुदगी का यह था कि उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाने के 8 दिनों के भीतर ही पुलिस ने उसके जैशे मुहम्मद में शामिल होने की पुष्टि कर दी थी जबकि श्रीनगर के बेमिना के पीएचडी स्कालर के प्रति पुलिस पौने दो माह के बाद भी चुप्पी साधे हुए है।

हालांकि अब्दुल के आतंकी गुट में शामिल होने की घटना से उसके परिजन भी स्तब्ध हैं। उनका कहना था कि अगर वाकई अब्दुल को अपने बेटे की मौत का गम था तो उसे नवम्बर 2017 में हुई उसकी मौत के बाद ही ऐसा कदम उठा लेना चाहिए था। उसने इतने सालों के बाद ऐसा क्यों किया, यह जरूर जांच का विषय था।

इतना जरूर था कि कश्मीर में फैले आतंकवाद के इतिहास में यह मामला पहला है जिसमें इतनी उम्र के व्यक्ति ने आतंकी बनने का फैसला किया हो। फिलहाल पुलिस भी मामले की गहराई से जांच में जुटी है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि अब्दुल ने यह कदम उठाया है।

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