पटना: बिहार में सम्राट सरकार बनने के बाद कानून-व्यवस्था को लेकर भले ही बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है। हाल यह है कि राजधानी पटना में एक ही सप्ताह के भीतर दो सामूहिक दुष्कर्म की घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। ताजा मामला एक 15 वर्षीय किशोरी से जुड़ा है, जो आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा से ट्रेन पकड़कर पटना पहुंची थी। उसे मोतिहारी जाना था, लेकिन पटना जंक्शन पर उसका मोबाइल फोन चोरी हो गया। इस घटना के बाद वह स्टेशन पर परेशान और अकेली बैठी थी। इसी दौरान एक युवक विकास उर्फ विजय उससे मिला और मदद का झांसा देकर उससे बातचीत शुरू की।
बताया जाता है कि विकास ने किशोरी को भरोसे में लेकर मोबाइल चोरी की शिकायत दर्ज कराने का बहाना बनाया और उसे गांधी मैदान की ओर ले गया। वहां उसने अपने साथी अरविंद को बुलाया। इसके बाद दोनों उसे कार में बैठाकर पटना जंक्शन के पास एक सुनसान जगह ले गए, जहां दोनों ने उसके साथ जबरन बारी-बारी से दुष्कर्म किया। विरोध करने पर जान मारने की धमकी दे कर उसे चुप करा दिया।
हैरानी की बात यह है कि आरोपियों ने वारदात के बाद भी किशोरी को नहीं छोड़ा। उसे दो दिनों तक कार में घुमाते रहे। फिर बेऊर इलाके के एक निर्माणाधीन मकान में ले जाया गया, जहां एक और आरोपी पवन राय पहले से मौजूद था। वहां तीनों ने मिलकर दोबारा बारी-बारी से दुष्कर्म किया। जब किशोरी की तबीयत बिगड़ने लगी, तो आरोपियों ने उसे 3 मई को दानापुर रेलवे स्टेशन के पास छोड़ दिया और फरार हो गए। बदहवास हालत में वह प्लेटफॉर्म पर बैठी रही। कुछ समय बाद मुख्य आरोपी फिर वहां पहुंचा, लेकिन किशोरी ने उसके साथ जाने से इंकार कर दिया।
इस बीच किशोरी के रोने पर आसपास के लोगों ने उसे पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई। किशोरी को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया और बयान दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस ने विकास और पवन राय को गिरफ्तार कर लिया, जबकि तीसरा आरोपी अरविंद अभी भी फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। ऐसे में राज्य में महिलाएं और बेटियां के सुरक्षित होने के दावों की पोल खोल दे रही हैं।