Mumbai Birth Certificate Scam: 87,000 से ज़्यादा नकली दस्तावेज़ों की जांच के लिए SIT गठित
By रुस्तम राणा | Updated: May 6, 2026 15:33 IST2026-05-06T15:33:12+5:302026-05-06T15:33:12+5:30
राष्ट्रीय सुरक्षा और पहचान धोखाधड़ी से जुड़े गंभीर परिणामों को देखते हुए, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने व्यक्तिगत रूप से एसआईटी के गठन का आदेश दिया, ताकि इस प्रणाली का दुरुपयोग करने वालों को जड़ से खत्म किया जा सके।

Mumbai Birth Certificate Scam: 87,000 से ज़्यादा नकली दस्तावेज़ों की जांच के लिए SIT गठित
मुंबई: मुंबई पुलिस ने बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के अंदर बड़े पैमाने पर हुए जन्म प्रमाण पत्र घोटाले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एसआईटी का नेतृत्व संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध शाखा) लक्ष्मी गौतम करेंगी।
यह जांच बीएमसी के स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक अनधिकृत एसएपी प्रणाली के माध्यम से जारी किए गए 87,347 जन्म प्रमाण पत्रों पर केंद्रित है। केंद्र सरकार के सिविल पंजीकरण प्रणाली (CRS) पोर्टल को दरकिनार करके जारी किए गए इन प्रमाण पत्रों ने पहचान सत्यापन प्रोटोकॉल में गहरी प्रणालीगत कमजोरियों को उजागर किया है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और पहचान धोखाधड़ी से जुड़े गंभीर परिणामों को देखते हुए, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने व्यक्तिगत रूप से एसआईटी के गठन का आदेश दिया, ताकि इस प्रणाली का दुरुपयोग करने वालों को जड़ से खत्म किया जा सके।
'द हिंदू' द्वारा उद्धृत मेयर ऋतु तावड़े के अनुसार, मुंबई के नगर निगम वार्डों में की गई एक जांच से पता चला है कि 87,347 जन्म प्रमाण पत्र एक बंद हो चुकी एसएपी प्रणाली के माध्यम से अवैध रूप से तैयार किए गए थे। यह उल्लंघन 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969' का उल्लंघन है, जो यह अनिवार्य करता है कि सभी पंजीकरण केवल केंद्र सरकार के सीआरएस पोर्टल के माध्यम से ही किए जाएं।
यह पता चला है कि 2024 और 2026 के बीच एक बंद हो चुके एसएपी सिस्टम के ज़रिए 87,347 बिना मंज़ूरी वाले दस्तावेज़ जारी किए गए थे। सिस्टम में हुई इस सेंधमारी ने केंद्र सरकार के अनिवार्य रजिस्ट्रेशन पोर्टल को भी दरकिनार कर दिया था। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब बीजेपी के वरिष्ठ नेता किरीट सोमैया ने औपचारिक शिकायत की और उसके बाद राज्य की उप मुख्य रजिस्ट्रार डॉ. बबीता कमलापुरकर ने निर्देश जारी किए।
अभी तक सामने आए 236 मामलों में से 137 मामलों में पहले ही प्रशासनिक कार्रवाई की जा चुकी है, जबकि बाकी मामलों को आगे की गहरी आपराधिक जाँच के लिए विशेष जाँच दल (SIT) को सौंप दिया गया है। मेयर तावड़े ने कई मेडिकल ऑफिसर ऑफ़ हेल्थ (MOHs) की पहचान की है, जिनके ख़िलाफ़ पहले ही अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा चुकी है। इस कार्रवाई में अंधेरी (K East), दहिसर (R North), भायखला (E ward) और कुर्ला (L ward) जैसे अहम नागरिक वार्डों में उनका तबादला या निलंबन शामिल है।
इन प्रशासनिक कदमों के बावजूद, किरीट सोमैया ने बीएमसी अधिकारियों पर इस घोटाले की पूरी सच्चाई को दबाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मेयर के साथ कई बैठकें होने के बाद भी "मामले को दबाने का खेल" जारी रहा। उन्होंने चेतावनी दी कि अवैध रूप से जारी किए गए ये 87,347 प्रमाणपत्र सुरक्षा के लिहाज़ से एक बड़ा ख़तरा हैं, क्योंकि इनका इस्तेमाल आधार जैसे अन्य सरकारी पहचान पत्र हासिल करने के लिए किया जा सकता है।