किरण चोपड़ा
इसमें कोई शक नहीं कि हमारे यहां एडवेंचर टूरिज्म गतिविधियां बहुत तेजी से बढ़ रही हैं. बोटिंग तथा समुद्री गतिविधियों के प्रति लोगों का क्रेज भी बढ़ा है, लिहाजा ऐसी गतिविधियों की लोकप्रियता नदियों, समुद्र वाले क्षेत्रों में बहुत बढ़ गई है. ये बहुत आकर्षक व मनमोहक हैं लेकिन अगर सुरक्षा नहीं तो समझो जान आफत में चली जाती है. हाल ही में जबलपुर में बरगी डैम के पानी में हुए क्रूज हादसे ने सचमुच हिलाकर रख दिया है.
कुल नौ लोग डूबकर मर गए लेकिन जिस मां व उसके साल भर के बेटे की मौत का भयावह मंजर सोशल मीडिया पर उभरा, उसने पूरी दुनिया की मानवता को झकझोर कर रख दिया है. एक मां के सीने से उसका मासूम बेटा चिपका पड़ा है. दोनों के शव जब डैम के गहरे पानी से निकाले गए तब भी वे अलग नहीं हो रहे थे. मां की ममता मौत के बाद भी जीत गई.
लाइफ जैकेट पहने मां और उसके सीने से चिपके बेटे की यह दर्दनाक तस्वीर देखकर हर किसी की रुह कांप गई. यह मां और बेटा दिल्ली से गए उस परिवार के सदस्य थे जिसमें इन दोनों को तो काल ने निगल लिया लेकिन पानी की बेरहम लहरों से बचे पिता और बेटी अब जिंदगी भर इस ट्रेजेडी को कभी भुला नहीं पाएंगे. मां-बेटे और साथ ही अन्य लोगों की मौत एक सवालिया निशान लगा रही है.
आखिरकार ये लाइफ जैकेट कितनी सेफ है. क्या लाइफ जैकेट सुरक्षा की गारंटी है. इसका जवाब कौन देगा? मौसम के बदलाव या चेतावनी को लेकर क्रूज में सवार चालक दल तथा निगरानी केंद्र के स्टाफ में तालमेल नहीं था तो इस सवाल का भी जवाब कौन देगा?
जबलपुर में हुई क्रूज दुर्घटना ने एक बार फिर भारत में जल-सुरक्षा के मुद्दे को गंभीरता से सामने ला दिया है. ऐसी घटनाएं यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या हमारे देश में पानी से जुड़ी गतिविधियों- जैसे बोटिंग, क्रूज यात्रा या नदी-झील पर्यटन के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था मौजूद है या नहीं. साथ ही, जब हम सिंगापुर और मलेशिया जैसे देशों को देखते हैं तो वहां की सुव्यवस्थित और सुरक्षित जल-पर्यटन प्रणाली हमें एक तुलना करने के लिए प्रेरित करती है. जबलपुर में हुई दुर्घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है. अक्सर नावों में क्षमता से अधिक लोग बैठा लिए जाते हैं, लाइफ जैकेट्स की कमी होती है और चालक (ऑपरेटर) को पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं दिया जाता. कई बार सुरक्षा नियम सिर्फ कागजों तक सीमित रहते हैं. यह लापरवाही जानलेवा साबित होती है.
मेरा मानना है कि जबलपुर जैसी घटनाएं हमें यह याद दिलाती हैं कि सुरक्षा कोई विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता है. भारत में जल पर्यटन को सुरक्षित बनाने के लिए सरकार, प्रशासन और आम जनता तीनों को मिलकर काम करना होगा. सिंगापुर और मलेशिया जैसे देशों से हमें सीख लेनी चाहिए कि कैसे सख्त नियम, जागरूकता और तकनीक के जरिये हादसों को रोका जा सकता है.