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'उसरी चट्टी कांड' में 21 साल बाद मुख्तार अंसारी के खिलाफ दर्ज हुआ हत्या का मुकदमा

By रुस्तम राणा | Updated: January 22, 2023 16:51 IST

अधिकारियों ने रविवार को बताया कि मुख्तार अंसारी के खिलाफ गाजीपुर के पीएस मोहम्मदाबाद में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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ठळक मुद्दे21 वर्ष बाद मुख्तार अंसारी सहित पांच के खिलाफ हत्या सहित विभिन्‍न धारा में मुकदमा दर्ज किया गयाअंसारी के खिलाफ गाजीपुर के पीएस मोहम्मदाबाद में आईपीसी की धारा 302 के तहत मामला दर्ज किया गया15 जुलाई साल 2021 में उसरी चट्टी पर मुख्तार अंसारी के काफिले पर हमला हुआ था

गाजीपुर: उत्तर प्रदेश के बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी को एक बड़ा झटका देते हुए, यूपी पुलिस ने 2001 के 'उसरी चट्टी’ गैंगवार की घटना के संबंध में उसके खिलाफ हत्या का एक और मामला दर्ज किया है। थाना क्षेत्र के उसरी चट्टी के पास मुख्तार अंसारी के काफिले पर हुए हमले के मामले में 21 वर्ष बाद मुख्तार अंसारी सहित पांच के खिलाफ हत्या सहित विभिन्‍न धारा में मुकदमा दर्ज किया गया है। 

अधिकारियों ने रविवार को बताया कि अंसारी के खिलाफ गाजीपुर के पीएस मोहम्मदाबाद में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 के तहत मामला दर्ज किया गया है। एडीजी के आदेश पर हुई कार्रवाई के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। 15 जुलाई 2001 को यूसुफपुर फाटक आवास से मऊ जाने दौरान हमलावरों ने उसरी चट्टी पर मुख्तार अंसारी के काफिले पर हमला किया था। उसमें उनके सरकारी गनर सहित तीन लोग मारे गए थे, जबकि नौ लोग घायल हुए थे।

इससे पहले 18 जनवरी को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गाजीपुर एमपी/एमएलए कोर्ट के 15 मार्च के उस आदेश को खारिज कर दिया था, जिसमें अंसारी को बांदा में उच्च श्रेणी की जेल में रखने की अनुमति दी गई थी। यह आदेश जस्टिस डीके सिंह ने राज्य सरकार द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए दिया।

अदालत ने आदेश देते हुए कहा था कि विशेष अदालत का आदेश अधिकार क्षेत्र से बाहर है और गैंगस्टर, खूंखार अपराधी बाहुबली अंसारी कानूनी तौर पर जेल में उच्च श्रेणी पाने का हकदार नहीं है। याचिका में गाजीपुर की विशेष अदालत एमपी/एमएलए कोर्ट के उस आदेश की वैधता को चुनौती दी गई थी, जिसमें अंसारी को सुपीरियर जेल में रखने की अनुमति दी गई थी। 

राज्य सरकार ने कहा था कि यूपी जेल मैनुअल 2022 के मुताबिक, कोर्ट को सिर्फ सुपीरियर क्लास की सिफारिश करने का अधिकार है, लेकिन इसे स्वीकार या खारिज करने का अंतिम अधिकार सिर्फ सरकार के पास है। हाईकोर्ट को यह अधिकार है कि वह राज्य सरकार और जिला न्यायालय के जिलाधिकारी को अपनी सिफारिश भेज सकता है। 

राज्य सरकार ने अदालत में कहा, "अंसारी का लंबा आपराधिक इतिहास है। उस पर 58 आपराधिक मामले दर्ज हैं। वह गैंग का सरगना है। अपराध गंभीर प्रकृति का है। खूंखार अपराधी को श्रेष्ठ वर्ग नहीं दिया जा सकता। अधीनस्थ न्यायालय ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर उच्च श्रेणी देने का निर्देश दिया है। अदालत को ऐसा आदेश देने का कोई अधिकार नहीं है।” 

टॅग्स :मुख्तार अंसारीउत्तर प्रदेशहत्याmurder case
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