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दिल्ली हाई कोर्ट ने पूर्व टीवी एंकर सुहैब इलियासी को पत्नी की हत्या के मामले में किया बरी

By भाषा | Updated: October 5, 2018 15:26 IST

इलियासी अपराध पर आधारित कार्यक्रम ‘इंडियाज मोस्ट वांटेड’ से सुर्खियों में आए थे।  उच्च न्यायालय ने इलियासी को 26 अप्रैल को अंतरिम जमानत दी थी लेकिन 14 मई को राहत को बढ़ाने से मना कर दिया था।

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नई दिल्ली, 05 अक्टूबर: दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को पूर्व टीवी एंकर और निर्माता सुहैब इलियासी को उनकी पत्नी की हत्या के मामले में बरी कर दिया। न्यायमूर्ति एस मुरलीधर और विनोद गोयल की पीठ ने इलियासी की अपील को मंजूर कर लिया। इलियासी ने पत्नी अंजू की 18 साल पहले हुई हत्या के मामले में अपनी दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा को चुनौती दी थी।

पीठ ने कहा, ‘‘अपील मंजूर की जाती है।’’ फैसला सुनाये जाने के समय मौजूद इलियासी की बेटी आलिया ने खुशी जाहिर की और कहा कि उन्हें हमेशा अपने पिता पर भरोसा था। 

उन्होंने कहा, ‘‘मैं बहुत खुश हूं। मैं अभी ज्यादा बोलने की स्थिति में नहीं हूं। इन सब के दौरान हम सब इस बारे में चुप थे क्योंकि फैसला नहीं आया था। हमें काफी कुछ भुगतना पड़ा लेकिन मुझे अपने पिता पर पूर्ण विश्वास था और मैंने हमेशा उन पर भरोसा किया।’’ एक निचली अदालत ने 20 दिसंबर 2017 को इलियासी को अपनी पत्नी की हत्या करने के लिये आजीवन करावास की सजा सुनाई थी और कहा था कि उन्होंने ‘हत्या की और इसे आत्महत्या का रंग देने की कोशिश की।’’

इलियासी अपराध पर आधारित कार्यक्रम ‘इंडियाज मोस्ट वांटेड’ से सुर्खियों में आए थे।  उच्च न्यायालय ने इलियासी को 26 अप्रैल को अंतरिम जमानत दी थी लेकिन 14 मई को राहत को बढ़ाने से मना कर दिया था।

इसके बाद वह उच्चतम न्यायालय गये थे। उच्चतम न्यायालय ने भी उन्हें अंतरिम जमानत देने से इंकार कर दिया था। इलियासी ने अपने वकील राजीव मोहन के जरिए दायर अपील में दावा किया कि घटना के बाद पुलिस ने तीन महीने में कोई भी सामग्री एकत्र नहीं की और हत्या के अपराध के लिए उनपर आरोप लगाने के लिए कोई सबूत नहीं था। 

पुलिस ने दावा किया था कि उसने जांच एजेंसी को गुमराह किया था जिससे अपराध में उसकी संलिप्तता साबित होती है। अदालत ने इलियासी पर दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था और मुआवजा के तौर पर अंजू के माता-पिता को 10 लाख रुपये देने को कहा था।

पूर्व में इलियासी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 304 बी (दहेज हत्या) सहित हल्के प्रावधानों के तहत आरोप लगाये गये थे। हालांकि, अंजू की मां रूकमा सिंह और बहन रश्मि सिंह ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया जिसने अगस्त 2014 में आदेश दिया कि पूर्व टीवी निर्माता के खिलाफ हत्या के अपराध के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत मुकदमा चलाया जाए।

अंजू को 11 जनवरी 2000 को घायल अवस्था में अस्पताल ले जाया गया था। उसके शरीर पर चाकू से बने घाव के निशान थे। अस्पताल पहुंचने पर उसे मृत घोषित कर दिया गया था। इलियासी को 28 मार्च 2000 को गिरफ्तार किया गया था। साली और सास द्वारा इलियासी पर दहेज की खातिर अंजू को प्रताड़ित करने का आरोप लगाए जाने के बाद उनके खिलाफ मामले में आरोप तय किये गये थे।

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