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यूपी में भी मुजफ्फरपुर जैसा मामला, 10 साल की बच्ची ने बताया कैसे कराया जाता है देह व्यापार

By पल्लवी कुमारी | Updated: August 6, 2018 10:03 IST

पुलिस ने रात में ही संरक्षण गृह पर छापा मारा तो 42 में से 18 लड़कियां गायब मिलीं। पुलिस ने 24 लड़कियों को वहां से आजाद करवा दिया है।

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लखनऊ, 6 अगस्त: बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि ऐसा ही एक और केस उत्तर प्रदेश के देवरिया में देखने को मिल गया है। देवरिया के नारी संरक्षण गृह में भी देह व्यापार कराए जाने का खुलासा हुआ है। 

रविवार 6 अगस्त को यूपी पुलिस को जब इस संरक्षण गृह से भाग कर आई एक लड़की ने जो बताया, उसे सुन पुलिस भी हैरान थे। पुलिस ने रात में ही संरक्षण गृह पर छापा मारा तो 42 में से 18 लड़कियां गायब मिलीं। पुलिस ने 24 लड़कियों को वहां से आजाद करवा दिया है। मामले में कार्रवाई करते हुए संरक्षण गृह की संचालिका गिरिजा त्रिपाठी और उनके पति मोहन को गिरफ्तार कर लिया गया है। 

पुलिस अधीक्षक रोहन पी कनय के मुताबिक,  मां विंध्यवासिनी महिला एवं बालिका संरक्षण गृह नाम के एनजीओ की सूची में 42 लड़कियों के नाम दर्ज हैं। लेकिन पुलिस ने जब रविवार रात को छापा मारा तो 18 लड़कियां वहां से गायब मिली थी। उस वक्त संरक्षण गृह में सिर्फ 26 लड़कियां ही थी। 

पुलिस के मुताबिक संरक्षण गृह के खिलाफ काफी दिनों से शिकायत आ रही थी। जिसको ध्यान में रखते हुए इसकी मान्यता जून-2017 में समाप्त कर दी गई थी। सीबीआई ने भी संरक्षण गृह को अनियमितताओं में चिह्नित कर रखा है। संचालिका हाईकोर्ट से स्थगनादेश लेकर इसे चला रही है। 

देवरिया एसपी के मुताबिक बिहार के बेतिया जिले की दस साल की बच्ची वहां से भागकर किसी तरह थाने आई। वहां बच्ची ने संरक्षण गृह की अनियमितताओं के बारे में बताया। बच्ची के मुताबिक, वहां शाम चार बजे के बाद रोजाना कई लोग काले और सफेद रंग की कारों से आते थे और मैडम के साथ लड़कियों को लेकर जाते थे, वे देर रात रोते हुए लौटती थीं। 

संरक्षण गृह की संचालिका गिरिजा त्रिपाठी और उनके पति मोहन से पुलिस लगातार पूछताछ कर रही है।  मामले में मानव तस्करी, देह व्यापार व बाल श्रम से जुड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। 

बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस का मामला

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस (टीआईएसएस), मुम्बई द्वारा अप्रैल में राज्य के समाज कल्याण विभाग को सौंपी गई एक ऑडिट रिपोर्ट में यह मामला सबसे पहले सामने आया था।

बालिका गृह में रहने वाली 42 में से 34 लड़कियों के चिकित्सकीय परीक्षण में उनके साथ यौन उत्पीड़न की पुष्टि हुई है। एनजीओ ‘सेवा संकल्प एवं विकास समिति’ द्वारा चलाए जा रहे बालिका गृह का मालिक बृजेश ठाकुर इस मामले में मुख्य आरोपी है। इस मामले में 31 मई को 11 लोगों के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी। ठाकुर समेत 10 लोगों को तीन जून को गिरफ्तार किया गया था। एक व्यक्ति फरार है। 

बिहार पुलिस ने 26 जुलाई को इन आरोपियों के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) की अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था। राज्य सरकार ने 26 जुलाई को इसकी जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की थी और बाद में सीबीआई ने इसकी जांच राज्य पुलिस से अपने हाथ में ले ली थी।

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टॅग्स :उत्तर प्रदेशमुजफ्फरपुर बालिका गृह बलात्कार मामला
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