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लॉकडाउन के कारण पटरी से उतरी अर्थव्यवस्था के उबरने के दिख रहे संकेत: रिपोर्ट

By भाषा | Updated: October 17, 2020 16:23 IST

ब्रिकवर्क रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘अभी तक के सबसे कठिन लॉकडाउन के कारण छह महीने की दिक्कतों के बाद अंतत: अर्थव्यवस्था के लिये कुछ अच्छी खबरें हैं। उच्च आवृत्ति वाले कुछ संकेतक अर्थव्यवस्था में सुधार का संकेत दे रहे हैं।’’

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ठळक मुद्देकोरोना वायरस महामारी की रोकथाम के लिये लगाये गये कड़े लॉकडाउन के कारण अर्थव्यवस्था छह महीने तक दिक्कतों में फंसी रही।अब जल्दी जल्दी प्राप्त होने वाले कुछ आंकड़े संकेतक दे रहे हैं कि अर्थव्यवस्था की हालत सुधार पर है हालांकि अभी यह सुधार कमजोर है।

नई दिल्लीः कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम के लिये लगाये गये कड़े लॉकडाउन के कारण अर्थव्यवस्था छह महीने तक दिक्कतों में फंसी रही। अब जल्दी जल्दी प्राप्त होने वाले कुछ आंकड़े संकेतक दे रहे हैं कि अर्थव्यवस्था की हालत सुधार पर है हालांकि अभी यह सुधार कमजोर है। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गयी है।

ब्रिकवर्क रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘अभी तक के सबसे कठिन लॉकडाउन के कारण छह महीने की दिक्कतों के बाद अंतत: अर्थव्यवस्था के लिये कुछ अच्छी खबरें हैं। उच्च आवृत्ति वाले कुछ संकेतक अर्थव्यवस्था में सुधार का संकेत दे रहे हैं।’’

ऐसा अनुमान है कि यदि सरकार ने अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिये तत्काल कोई कदम नहीं उठाया तो सितंबर तिमाही में 13.5 प्रतिशत और चालू वित्त वर्ष में करीब 9.5 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। इस बीच विनिर्माण के खरीद प्रबंध सूचकांक (पीएमआई) में तेज सुधार देखने को मिला है। यह सूचकांक अगस्त में 52 था, जो सितंबर में 56.8 पर पहुंच गया। यह आठ साल की सबसे बड़ी तेजी है।

माल एवं सेवा कर (जीएसटी) का संग्रह पिछले साल सितंबर की तुलना में 3.8 प्रतिशत बढ़कर 95,480 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यह अगस्त 2020 की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक रहा। यात्री वाहनों की बिक्री में भी 31 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गयी है।

रेलवे माल ढुलाई में भी 15 प्रतिशत तेजी आयी है। छह महीने के अंतराल के बाद वस्तुओं के निर्यात में भी 5.3 प्रतिशत की वृद्धि आयी है। रेटिंग एजेंसी ने कहा, ‘‘हालांकि, ऐसे संकेत हैं कि यह सुधार नरम है। दूसरी तिमाही के दौरान पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में नयी परियोजनाओं पर पूंजीगत व्यय में 81 फीसदी की गिरावट आयी है। इससे निवेश में लगातार गिरावट आने का पता चलता है।’’ 

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