नयी दिल्ली, 10 फरवरी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के मामले में ढिलाई बरते जाने को लेकर भारतीय इस्पात प्राधिकरण (सेल) की खिंचाई की है। इसकी वजह से 2018 में कंपनी के भिलाई इस्पात कारखाने (बीएसपी) में विस्फोट हुआ जिसमें 14 लोगों की मौत हो गयी थी।
उल्लेखनीय है कि नौ अक्टूबर, 2018 को भिलाई कारखाने की गैस पाइपलाइन में सुबह करीब 10.30 बजे विस्फोट हुआ था। यह पाइपलाइन कोक ओवन खंड से जुड़ी हुई थी।
कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उसने सेल की 2014 से 2019 के दौरान सुरक्षा नीति और पर्यावरण प्रबंधन से संबंधित सभी रिकार्ड की जांच की।
संसद में मंगलवार को पेश रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी के संयंत्रों में उक्त अवधि में नियमों के अनुसार जितनी संख्या में सुरक्षा अधिकारियों की जरूरत थी, उससे कहीं कम तैनाती की गयी थी।
रिपोर्ट में इस बात का आकलन किया गया है कि क्या कंपनी ने निर्धारित कानूनù, नियम और मानक परिचालन गतिविधियों (एसओपी) का अनुपालन किया। साथ ही इसमें इसमें इस बात का भी आकलन किया गया है कि क्या पर्यावरण और प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित सामाजिक जिम्मेदारी, सुरक्षा मानदंडों और बेहतर औद्योगिक गतिविधियों का अनुकरण किया गया है।
कैग के अनुसार, ‘‘यह पाया गया कि सेल सुरक्षा संगठन ने अपनी सिफारिशों को क्रियान्वित करने के लिये कोई योजना या समयसीमा निर्धारित नहीं की। भिलाई कारखाने में पंप हाउस में पाइपलाइनों के टूटने से पानी का दबाव कम हुआ और ब्लास्ट फर्नेस गैस पम्प हाउस में फैल गई जिससे छह लोगों की मौत हो गई।’’
रिपोर्ट में कहा गया है कि सुरक्षा उपायों को सख्ती से नहीं लागू करने और मानक परिचालन व्यवस्था नहीं अपनाने के कारण भिलाई कारखाने में दुर्घटना हुई जिसमें 14 लोगों की मौत हो गई।
सेल के ओड़िशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ में पांच एकीकृत इस्पात कारखाने हैं।
रिपोर्ट के अनुसार सेल के कारखानों में कार्बन (सीओ2) उत्सर्जन अंतरराष्ट्रीय मानकों से अधिक है। इतना ही नहीं संयंत्रों में औसत ऊर्जा खपत वैóश्विक औसत के साथ-साथ टाटा स्टील और राष्ट्रीय इस्पात निगम लि. से भी अधिक है।
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