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रीयल्टी कंपनियों ने आरबीआई के कदम को सराहा, निम्न ब्याज दर व्यवस्था बनी रहने की उम्मीद जतायी

By भाषा | Updated: February 5, 2021 19:43 IST

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नयी दिल्ली, पांच फरवरी जमीन-जायदाद के विकास से जुड़ी कंपनियों और परामर्शदाताओं ने शुक्रवार को कहा कि रिजर्व बैंक का नीतिगत दर में बदलाव नहीं करने के निर्णय का मतलब है कि आवास ऋण पर निम्न ब्याज दर की स्थिति बनी रहेगी। हालांकि उनका कहना है कि अगर प्रमुख नीतिगत दर में कटौती की जाती, इससे मकानों की मांग और बढ़ती जिसमें पिछले कुछ महीनों से पुनरूद्धार देखा जा रहा है।

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने आम सहमति से नीतिगत दर को 4 प्रतिशत पर बरकरार रखने का निर्णय किया। उन्होंने यह भी कहा कि प्रमुख महानगरों में मकानों की बिक्री और नई रिहायशी परियोजनाओं के शुरू होने के आंकड़े रीयल एस्टेट क्षेत्र में नये भरोसे को प्रतिबिंबित करते हैं।

कोविड-19 महामारी और उसकी रोकथाम के लिये लगाये गये ‘लॉकडाउन’ के कारण मकानों की बिक्री अप्रैल-जून के दौरान बुरी तरीके से प्रभावित हुई। हालांकि बाद में अक्ट्रबर-दिसंबर के दौरान ब्याज दर के 7 प्रतिशत पर आने के साथ मांग में तेजी देखी गयी।

नारेडको (नेशनल रीयल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल) के अध्यक्ष निरंजन हीरानंदानी ने कहा, ‘‘ बाजार की मौजूदा हालात को देखते हुए, आरबीआई का नीतिगत दर को यथावत रखने का निर्णय आशा के अनुरूप है। हालांकि अगर रेपो दर में कटोती होती तो उद्योग पर महामारी के कारण जो आर्थिक संकट आया है, उससे और बेहतर तरीके से निपटने में मदद मिलती।’’

टाटा रीयल्टी और इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) संजय दत्त ने शीर्ष बैंक के नीतिगत दर को यथावत रखने के निर्णय का स्वागत किया।

उन्होंने कहा, ‘‘उदार रुख को बनाये रखना काफी महत्वपूर्ण है। खासकर तब जब पुनरूद्धार के संकेत दिख रहे हैं।’’

सीबीआरई के चेयरमैन और सीईओ (भारत, दक्षिण पूर्व एशिया, पश्चिम एशिया और अफ्रीका) अंशुमन मैगजीन ने कहा कि आरबीआई ने खपत बढ़ाने के इरादे से लगातार चौथी बार नीतिगत दर को बरकरार रखा है जो एक सकारात्मक कदम है।

एनरॉक के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि रीयल एस्टेट उद्योग की हमेशा आकांक्षा रहती है कि ब्याज दर कम हो।

उन्होंने कहा, ‘‘मकानों की मांग पटरी पर आती दिख रही है और इस मांग को बढ़ाने की जरूरत है। हालांकि मौजूदा हालात को देखते हुए आरबीआई का मैजूदा रुख बिल्कुल वाजिब है। हमें भरोसा है कि महामारी के कारण जो समस्याएं हैं, उसके दूर होने के साथ दरों को और अनुकूल स्तर पर लाया जाएगा।’’

हाउसिंग डॉट कॉम और प्रोपटाइगर के समूह सीईओ ध्रुव अग्रवाल ने कहा कि इस समय नीतिगत दर में बदलाव नहीं करना और उदार रुख बनाये रखने के कदम को समझा जा सकता है। ‘‘हालांकि प्रमुख नीतिगत दर में और कटौती से मौजूदा मांग को और गति मिलेगी।’’

उन्होंने कहा कि आरबीआई गवर्नर ने नकदी बढ़ाने को लेकर जिन उपायों की घोषणा की है, वह वास्तव में अच्छा कदम है और उसकी जरूरत थी।

रीयल्टी कंपनी गौड़ समूह के प्रबंध निदेशक मनोज गौड़ ने कहा कि आरबीआई का निर्णय बाजार की उम्मीदों के अनुरूप है। ‘‘मुद्रास्फीति में गिरावट आ रही है। इसको देखते हुए उम्मीद है कि आरबीआई आने वाले समय में नीतिगत दर में कटौती करेगा।’’

नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन और प्रबंध निदशक शिशिर बैजल ने कहा कि निर्णय उम्मीदों के अनुरूप है। एनबीएफसी (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों) के लिये नकदी उपलब्ध कराने का उपाय रीयल एस्टेट समेत दबाव झेल रहे अन्य क्षेत्रों के लिये मददगार होगा। ’’

नारेडको महाराष्ट्र के संयुक्त सचिव रोहित पोद्दार ने कहा, ‘भारत के नीति निर्माता देश की अर्थव्यवस्था के उद्धार के लिए जो सबसे अच्छा हो सकता है, वैसे ही फैसले कर रहे हैं।’

एस रहेजा रियल्टी के निदेशक राम रहेजा ने कहा कि रिजव बैंक के रूख से आवास ऋण पर ब्याज दरें , जो इस समय कई वर्ष के न्यूनतम स्तर पर हैं, नीचे बनी रहेंगी।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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