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आरबीआई का नरम रुख आर्थिक वृद्धि को गति देने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है: उद्योग जगत, विशेषज्ञ

By भाषा | Updated: February 5, 2021 19:33 IST

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मुंबई, पांच फरवरी उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और आर्थिक विशेषज्ञों ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की बजट के बाद पेश मौद्रिक नीति समीक्षा देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत पुनरूद्धार के रास्ते पर ले जाने की उसकी प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करती है।

हालांकि आरबीआई ने नीतिगत दर में कोई बदलाव नहीं किया। लेकिन उसने अर्थव्यवस्था को गति देने के लिये उदार रुख बनाये रखने के साथ सरकार के लगभग रिकार्ड कर्ज की जरूरत को पूरा करने का प्रबंध करने के साथ साथ बाजार की कर्ज की जरूरतों के लिए पर्याप्त धन का प्रवाह बनाए रखने का भरोसा दिया है।

उद्योग मंडल फिक्की के अध्यक्ष उदय शंकर ने कहा, ‘‘पुनरूद्धार के संकेत मजबूत दिख रहे हैं और केंद्रीय बैंक ने जो रुख जताया है, वह वृद्धि को समर्थन देने को लेकर उसकी प्रतिबद्धता को बताता है।’’

उन्होंने कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिये और कर्ज प्रवाह काफी सकारात्मक कदम है और यह बताता है कि अधिक दबाव वाले की जरूरत को पूरा करने के लिये लक्षित रुख अपनाया गया है।

एसोचैम के महासचिव दीपक सूद ने कहा कि आरबीआई की मौद्रिक नीति समीक्षा मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था को तेजी से मजबूत पुनरूद्धार के रास्ते पर ले जाने में मददगार साबित होगी।

सूद ने कहा, ‘‘मानक दर रेपो में बिना कोई बदलाव किये आरबीआई की मौद्रिक नीति में कई उपाय किये गये हैं, जिससे बाजार में तेजी आएगी। इसमें सरकारी प्रतिभूति बाजार को खुदरा निवेशकों के लिये खोला जाना शामिल हैं।’’

पीएचडी चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष संजय अग्रवाल के अनुसार आरबीआई के बयान में कहा गया है कि आर्थिक और व्यापार में पुनरूद्धार के संकेतक और मजबूत हुए हैं तथा ऐसे क्षेत्रों की संख्या बढ़ रही है, जो पटरी पर आ गये है। ‘‘यह काफी उत्साहजनक है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम आने वाले समय में रेपो दर में कटौती की उम्मीद कर रहे हैं। क्योंकि कोष की लागत को नीचे लाना है।’’

सीआईएफएल के कार्यकारी चेयरमैन और बाजार नियामक सेबी की तकननीकी समिति के चेयरमैन हर्ष भानवाला ने कहा कि आरबीआई ने लक्षित दीर्घकालीन रेपो परिचालन (टीएलटीआरओ) व्यवस्था के तहत एनबएसफसी (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों) को सदा सुलभ आधार पर कर्ज देने की सुविधा दी है, इससे नकदी प्रवाह बढ़ेगा।

उन्होंने कहा कि इससे सस्ते मकान वाली परियोजनाओं, एसएमई और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में तेजी आने की उम्मीद है।

इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के प्रधान अर्थशास्त्री सुनील कुमार सिन्हा ने कहा कि हालांकि आरबीआई ने नीतिगत दर में कोई बदलाव नहीं किया लेकिन इस बात की आशंका थी कि केंद्रीय बैंक कोविड-19 संकट के प्रभाव से निपटने के लिये बैंकों को दिये गये कुछ नियामकीय छूट को वापस ले सकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) और सांवधिक तरलता अनुपात (एसएलआर) के तहत एचटीएम (हेल्ड टू मैचुरिटी) यानी परिपक्वता तक बांड को रखने जाने की श्रेणी को छोड़कर उसने अन्य छूट के लिये समयसीमा बढ़ा दी और कुछ मामलों में विस्तार भी किया है।’’

एमके वेल्थ मैनेजमेंट के अनुसंधान प्रभाग के प्रमुख डा जोसफ थामस, ने कहा, " आरबीआई की नीति का आधार नरमी कहा है। रेपो दर के मामले में यथा स्थिति बनाए रखना इस चीज को दर्शाता है। पर इसमें जरूरत से ज्यादा तरलता के होने का बोध होने का भी संकेत है। इसी लिए सीआरआर (आरक्षित नकदी अनुपाता) को चरणबद्ध तरीके से महामारी के पहले 4 प्रतिशत पर बहाल करने का एक रास्ता समझाया गया है।’

रिलायंस होम फाइनेंस के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) रवीन्द्र सुधाल्कर ने कहा, ‘‘खुदरा निवेशकों को सरकारी प्रतिभूति बाजार में सीधे तौर पर निवेश की अनुमति देना बड़ा कदम है। साथ ही ओम्बुड्समैन योजनाओं को एकीकृत करने की योजना, निवासियों को एनआरआई के लिये सीधे पैसा भेजने की अनुमति यह बताता है कि स्थिति सामान्य हो रही है।

उन्होंने कहा कि सीआरआर को पूर्व के स्तर पर लाने की योजना भी आने वाले महीनों में निवेश को प्रोत्साहित करेगा।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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