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रिजर्व बैंक ने की नीतिगत दर में 0.35 प्रतिशत की बड़ी कटौती, मकान, वाहन कर्ज होंगे सस्ते

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: August 8, 2019 05:49 IST

 रिजर्व बैंक ने अर्थव्यवस्था की धीमी पड़ती चाल को गति देने के लिए बुधवार को प्रमुख नीतिगत दर रेपो में 0.35 प्रतिशत की बड़ी कटौती की

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 रिजर्व बैंक ने अर्थव्यवस्था की धीमी पड़ती चाल को गति देने के लिए बुधवार को प्रमुख नीतिगत दर रेपो में 0.35 प्रतिशत की बड़ी कटौती की. यह लगातार चौथा मौका है जब रेपो दर में कमी की गई है. इस कटौती के बाद रेपो दर 5.40 प्रतिशत रह गई जो नौ साल का न्यूनतम स्तर है.

लेकिन इसके साथ केंद्रीय बैंक ने मांग और निवेश में नरमी के कारण 2019-20 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर के जून के अनुमान को भी 7.0 प्रतिशत से घटाकर 6.9 प्रतिशत कर दिया. नीतिगत दर में कटौती से आवास, वाहन कर्ज की मासिक किस्तें (ईएमआई) कम होने के साथ-साथ कंपनियों के लिए कर्ज सस्ता होने की उम्मीद है. रेपो दर वह दर होती है जिस पर केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकाल के लिए नकदी उपलब्ध कराता है.

रेपो दर में इस कटौती के बाद रिजर्व बैंक की रिवर्स रेपो दर भी कम होकर 5.15 प्रतिशत, सीमांत स्थायी सुविधा (एमएसएफ) दर और बैंक दर घटकर 5.65 प्रतिशत रह गई.मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक एक, तीन और चार अक्तूबर 2019 को होगी. नीतिगत दर में यह कटौती सामान्य तौर पर होने वाली कटौती से हटकर है. आम तौर पर आरबीआई रेपो दर में 0.25 प्रतिशत या 0.50 प्रतिशत की कटौती करता रहा है, लेकिन इस बार उसने 0.35 प्रतिशत की कटौती की है.

रेपो दर में चार बार में अब तक कुल 1.10 प्रतिशत की कटौती की जा चुकी है. यह पूछे जाने पर कि आरबीआई ने आखिर रेपो दर में 0.35 प्रतिशत की कटौती क्यों की, आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि यह कोई अप्रत्याशित नहीं है, यह कटौती संतुलित है. उन्होंने कहा कि 0.25 प्रतिशत की कटौती अपर्याप्त मानी जा रही थी जबकि 0.50 प्रतिशत की कटौती अधिक होती. इसीलिए एमपीसी ने संतुलित रुख अपनाते हुए 0.35 प्रतिशत कटौती की है. केंद्रीय बैंक 2006 से नीतिगत दर में 0.25 प्रतिशत और 0.50 प्रतिशत की कटौती की थी. दास ने कहा, 'मांग और निवेश में नरमी से वृद्धि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है.' हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि नरमी चक्रीय है और यह कोई संरचनात्मक नहीं है.

उन्होंने कहा, 'हालांकि संरचनात्मक सुधारों की जरूरत है...चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में वृद्धि में गति देने की उम्मीद है.' इस बीच, वित्त सचिव राजीव कुमार ने कहा है कि आरबीआई का नीतिगत दर में कटौती का कदम सकारात्मक और अब बैंकों को चाहिए कि वे उसका लाभ ग्राहकों को दें. डिजिटल लेन-देन को गति डिजिटल लेन-देन को गति देने के लिए एनईएफटी के जरिये 24 घंटे कोष हस्तांतरण की अनुमति देने का निर्णय किया है, फिलहाल राष्ट्रीय इलेक्ट्रानिक कोष हस्तांतरण (एनईएफटी) का परिचालन आरबीआई खुदरा भुगतान व्यवस्था के रूप में करता है. यह ग्राहकों के लिये दूसरे और चौथे शनिवार के अपवाद के साथ सभी कामकाजी दिवस में सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे तक के लिए उपलब्ध होता है.

साथ ही आवर्ती बिलों के भुगतान का प्रावधान करने वाली सभी इकाइयों को भारतीय बिल-भुगतान प्रणाली (बीबीपीएस) के मंच से जुड़ने की छूट देने का फैसला किया गया है. बीबीपीएस एक ऐसा मंच है जो दूसरी प्रणालियों के साथ सूचनाओं का आदान प्रदान करने में समर्थ है. इसके माध्यम से इस समय डीटीएच, बिजली, गैस, टेलीफोन और पानी -पांच क्षेत्रों की कंपनियों इकाइयों के बिल जमा कराए जा सकते हैं.

टॅग्स :भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई)
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