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पॉवेल ने दिया संकेत, आखिरी तिमाही में अमेरिकी केंद्रीय बैंक नरम मौद्रिक नीति में लाएगा बदलाव

By भाषा | Updated: August 27, 2021 21:09 IST

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वाशिंगटन, 27 अगस्त (एपी) अमेरिका का केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व नौकरियों में सुधार होने के साथ न्यूनतम ब्याज दर वाली उदार मौद्रिक नीति में इस साल के आने वाले महीनों में बदलाव लाना शुरू करेगा। फेडरल रिजर्व के प्रमुख जेरोम पॉवेल ने शुक्रवार को महामारी के कारण उत्पन्न भीषण संकट और अर्थव्यवस्था पर पड़े प्रतिकूल प्रभाव से निपटने के लिये शुरू किये गये अभूतपूर्व कदमों को समाप्त किये जाने का संकेत दिया। फेडरल रिजर्व के इस कदम से मकान, क्रेडिट कार्ड और कारोबार के लिये कर्ज लेना महंगा हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि अर्थव्यवस्था को राहत देने के लिये केंद्रीय बैंक हर महीने 120 अरब डॉलर का बांड (मोर्गेज और ट्रेजरी बांड) खरीद रहा है। इसका मकसद ब्याज दर को न्यूनतम स्तर पर बनाये रखते हुए कर्ज और खर्च को बढ़ावा देना है। पॉवेल का बयान यह संकेत देता है कि फेडरल रिजर्व बांड खरीद कार्यक्रम में कमी लाने या उसमें फेरबदल की घोषणा कर सकता है। यह घोषणा चालू वर्ष के अंतिम तिमाही में किये जाने की संभावना है। उन्होंने जैक्सन होल आर्थिक संगोष्ठि में ‘ऑनलाइन’ अपने संबोधन में यह साफ तौर पर कहा कि बांड खरीद कार्यक्रम में कमी का मतलब फेडरल रिजर्व की मानक दर में वृद्धि शुरू करना नहीं है। यह लगातार दूसरा साल है जब यह केंद्रीय बैंकों के अधिकारियों का सालाना सम्मेलन महामारी के कारण ‘ऑनलाइन’ हुआ है। मानक ब्याज दर महामारी की शुरूआत मार्च 2020 से शून्य के करीब है। जब तक फेडरल रिजर्व बांड खरीद कार्यक्रम में कमी को संपन्न नहीं कर लेता, नीतिगत दर में वृद्धि की आशंका नहीं है। हालांकि, पॉवेल ने कहा कि मुद्रास्फीति काफी बढ़ी है और फेडरल रिजर्व के 2 प्रतिशत सालाना महंगाई दर रखने के लक्ष्य को हासिल करने के लिये बांड खरीद कार्यक्रम में कमी जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि फेडरल रिजर्व के अधिक रोजगार सृजन के लक्ष्य की दिशा में साफ तौर पर प्रगति देखने को मिल रही है।फेडरल रिजर्व के अनुसार जुलाई में मुद्रास्फीति सालाना आधार पर बढ़कर 3.6 प्रतिशत पहुंच गयी। तीन दशकों में यह सबसे बड़ी वृद्धि है। हालांकि, मासिक आधार पर वृद्धि 0.5 प्रतिशत कम होकर 0.3 प्रतिशत रही। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय बैंक कोविड-19 के डेल्टा किस्म के अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव पर नजर रखे हुए है। इसके कारण अमेरिका में खासकर दक्षिण और पश्चिम क्षेत्र में संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ी है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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