लाइव न्यूज़ :

Ladakh protest: विंटर टूरिज्म की आशा धूमिल, लद्दाख हिंसा ने पानी फेरा, पर्यटकों की कमी

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: September 26, 2025 14:11 IST

Ladakh protest Highlights: लद्दाख में विंटर टूरिज्म आयोजित करने वालों को आशंका है कि इस बार पर्यटकों की कमी का सामना करना पड़ सकता है।

Open in App
ठळक मुद्देऐसा पहली बार है कि लद्दाख में इस प्रकार की हिंसा हुई हो। लद्दाखियों ने जो आंदोलन 30 सालों तक चलाया था।लद्दाख में टूरिस्टों का आना कभी थमा नहीं था।

Ladakh protest Highlights: स्टेटहुड की मांग पर बर्फीले रेगिस्तान लद्दाख में हुई हिंसा, जिसमें 4 लोगों की मौत के उपरांत कर्फ्यू लागू कर देना पड़ा, ने अगर लद्दाख में इस आंदोलन को एक नया मोड़ दे दिया वहीं इसने विंटर टूरिज्म पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। नतीजतन लद्दाख में विंटर टूरिज्म आयोजित करने वालों को आशंका है कि इस बार लद्दाख में पर्यटकों की कमी का सामना करना पड़ सकता है।

ऐसा पहली बार है कि लद्दाख में इस प्रकार की हिंसा हुई हो। अभी तक लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिलवाने के लिए लद्दाखियों ने जो आंदोलन 30 सालों तक चलाया था उस दौरान भी ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला था। यही नहीं इस तीस साल के आंदोलन के दौरान लद्दाख में टूरिस्टों का आना कभी थमा नहीं था।

पर अब सबके माथे पर चिंता की लकीरें हैं। विंटर टूरिज्म के आयोजक परेशान हैं। दरअसल परेशानी का कारण यह है कि उन्हें आशंका है कि यह आंदोलन तेजी पकड़ सकता है क्योंकि केंद्र सरकार इस आंदोलन के दौरान हुई हिंसा का ठीकरा पर्यावरणविद सोनम वांगचुक के माथे फोड़ कर उनके खिलाफ पीएसए जैसा कानून लागू करने के प्रति गंभीरता से विचार कर रही है।

जानकारी के लिए लद्दाख के विंटर टूरिज्म का सबसे प्रमुख आकर्षण चद्दर ट्रेक के अतिरिक्त कई और अन्य गतिविधियां भी होती हैं। इसके लिए बुंकिगें अभी से होनी आरंभ हो चुकी हैं। पर कल की हिंसा के बाद टूर आप्रेटरों के पास स्थिति के प्रति जानकारी लेने फोन आने शुरू हो चुके हैं। अगर सूत्रों पर विश्वास करें तो 10 परसेंट बुकिंग रद्द भी हो चुकी है।

लद्दाख में फैली हिंसा केंद्र सरकार के लिए भी चिंता का विषय है पर लद्दाखियों का कहना था कि यह एक षड्यंत्र था जिसके पीछे का मकसद उनके आंदोलन को बदनाम करना था। जिस प्रकार के आरोप राजनीतिक दलों के विरूद्ध लगाए जा रहे हैं वे सच्चाई से परे हैं।

बल्कि सच्चाई यह है कि पिछले 6 सालों से, 5 अगस्त 2019 से, लद्दाख के युवा अपने आपको असहाय महसूस कर रहे हैं। उन्हें अब यह अहसास हुआ है कि उनकी जिस पीढ़ी ने 30 सालों तक यूटी पाने का आंदोलन छेड़ा था वह गलत था। और अगर कल की घटनाओं को जनआंदोलन कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।

टॅग्स :लद्दाखजम्मू कश्मीरLadakh Buddhist Associationपर्यटनTourism
Open in App

संबंधित खबरें

भारतWeather Today: आज बाहर निकलने से पहले देख लें वेदर अपडेट! दिल्ली में हीटवेव तो बेंगलुरु में बारिश की संभावना

भारतजमानत नियम और जेल अपवाद, यूएपीए मामले में भी यही नियम?, सुप्रीम कोर्ट ने हंदवाड़ा निवासी सैयद इफ्तिखार अंद्राबी को दी राहत, पासपोर्ट जमा करने और हर 15 दिन में एक बार थाने जाओ?

भारतसुंबली मावस उत्सव: घाटी में गूंजी पुरानी आवाजें, 37 साल बाद कश्मीरी पंडितों ने अपनी मिट्टी को चूमा

क्राइम अलर्टजम्मू-कश्मीर: अपहरण के मामलों में 50% की कमी, लेकिन शून्य पर पहुंचना अभी बाकी

भारतचौंकाने वाला आंकड़ा: कश्मीर में कुत्तों से आगे निकलीं बिल्लियां, 85,000 से ज़्यादा लोग हुए शिकार

कारोबार अधिक खबरें

कारोबारMeta Layoffs: वर्क फ्रॉम होम और फिर सुबह 4 बजे आया 'छंटनी का फरमान'; मेटा ने 8 हजार कर्मचारियों को नौकरी से हटाया

कारोबारGold Price Today: सोने का भाव आज का 20 मई 2026, जानें दिल्ली, मुंबई समेत बड़े शहरों में सोने की कीमत

कारोबारFuel Price Today: 20 मई को पेट्रोल, डीजल और CNG की नई कीमतें घोषित, यहाँ जानें शहरवार ताजा दरें

कारोबारबुलेट ट्रेन परियोजना को व्यावहारिक बनाने की चुनौती

कारोबारइटली और भारत के बीच रणनीतिक साझेदारी?, 2029 तक व्यापार को 20 अरब यूरो से आगे ले जाना