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कंगना रनौत पर शिवसेना ने किया पलटवार, बॉलीवुड में लोग प्रतिभा के आधार पर सफल हुए हैं, धर्म के आधार पर नहीं

By भाषा | Updated: September 12, 2020 19:07 IST

पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में छपे संपादकीय में यह टिप्पणी अभिनेत्री कंगना रनौत के उस ट्वीट की पृष्ठभूमि में की गई जिसमें रनौत ने कहा था कि उन्होंने “इस्लाम के प्रभुत्व” वाले फिल्म उद्योग में अपना “जीवन और करियर” दांव पर लगाया तथा रानी लक्ष्मीबाई एवं छत्रपति शिवाजी महाराज पर फिल्में बनाईं।

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ठळक मुद्देफिल्म जगत में कलाकारों ने अपनी प्रतिभा के बल पर सफलता अर्जित की है न कि धर्म के बल पर।संपादकीय में कहा गया कि फाल्के द्वारा रखी गई आधारशिला का फल आज पूरे देश से आए कलाकारों को मिल रहा है।मुंबई में इस उद्योग में अपना भाग्य आजमाने जो आता है वह पहले फुटपाथ पर सोता है और फिर जुहू, पाली हिल और मालाबार हिल में बंगला बनाकर रहने चला जाता है।

मुंबईः शिवसेना ने शनिवार को कहा कि भारतीय फिल्म उद्योग की आधारशिला एक महाराष्ट्रिय दादासाहेब फाल्के द्वारा रखी गई थी और फिल्म जगत में कलाकारों ने अपनी प्रतिभा के बल पर सफलता अर्जित की है न कि धर्म के बल पर।

पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में छपे संपादकीय में यह टिप्पणी अभिनेत्री कंगना रनौत के उस ट्वीट की पृष्ठभूमि में की गई जिसमें रनौत ने कहा था कि उन्होंने “इस्लाम के प्रभुत्व” वाले फिल्म उद्योग में अपना “जीवन और करियर” दांव पर लगाया तथा रानी लक्ष्मीबाई एवं छत्रपति शिवाजी महाराज पर फिल्में बनाईं।

संपादकीय में कहा गया कि फाल्के द्वारा रखी गई आधारशिला का फल आज पूरे देश से आए कलाकारों को मिल रहा है। सामना में कहा गया, “मुंबई में इस उद्योग में अपना भाग्य आजमाने जो आता है वह पहले फुटपाथ पर सोता है और फिर जुहू, पाली हिल और मालाबार हिल में बंगला बनाकर रहने चला जाता है।

यह सभी लोग इस शहर और राज्य के हमेशा आभारी रहे हैं जिसने उन्हें उनके सपनों को सच करने का अवसर दिया। उन्होंने मुंबई को कभी धोखा नहीं दिया और शहर के विकास में अपना योगदान दिया।” मुखपत्र में कहा गया, “बहुत से कलाकारों को भारत रत्न और निशान ए पाकिस्तान से नवाजा गया है।”

संयोग से, कई साल पहले जब दिलीप कुमार ने निशान ए पाकिस्तान स्वीकार किया था तब शिवसेना ने इसका मुखर होकर विरोध किया था। संपादकीय में यह भी कहा गया कि मुंबई फिल्म उद्योग लाखों लोगों को रोजगार देता है। उद्योग में “खानों” के प्रभुत्व पर संपादकीय में कहा गया कि एक समय में फिल्म उद्योग में पंजाबियों और महाराष्ट्रियन लोगों का प्रभुत्व था। 

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