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अवधेश कुमार का ब्लॉगः पाकिस्तान की तिलमिलाहट अनपेक्षित नहीं

By अवधेश कुमार | Updated: August 9, 2019 07:22 IST

नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने और दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के फैसले के बाद पाकिस्तान की तिलमिलाहट भरी प्रतिक्रियाओं और उसके द्वारा लिए गए फैसले पर किसी को आश्चर्य नहीं हुआ है

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नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने और दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के फैसले के बाद पाकिस्तान की तिलमिलाहट भरी प्रतिक्रियाओं और उसके द्वारा लिए गए फैसले पर किसी को आश्चर्य नहीं हुआ है. इमरान सरकार द्वारा भारत के साथ डिप्लोमेटिक रिलेशंस को डाउनग्रेड करने यानी राजनयिक संबंध का दर्जा घटा दिए जाने तथा व्यापारिक संबंध निलंबित करने का फैसला बिल्कुल अपेक्षित था. पाकिस्तान ने भारतीय उच्चायुक्त अजय बिसारिया को वापस जाने को कहा.

फिलहाल भारत में पाकिस्तान का कोई उच्चायुक्त नहीं है. वह इसी महीने नई दिल्ली में मोइन उल-हक को उच्चायुक्त बनाकर भेजने वाला था लेकिन अब नहीं भेजेगा. वस्तुत: इस्लामाबाद में प्रधानमंत्नी आवास पर राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक के बाद कुल पांच फैसले सुनाए गए. राजनयिक संबंध का दर्जा घटाने तथा द्विपक्षीय व्यापार को निलंबित करने के साथ पाक के तीन फैसले और हैं. एक, भारत के साथ द्विपक्षीय रिश्तों और व्यवस्थाओं (समझौतों) की समीक्षा होगी. दो, मामले को संयुक्त राष्ट्र में ले जाया जाएगा, सुरक्षा परिषद में भी उठाया जाएगा. तीन, 14 अगस्त को कश्मीरियों के साथ एकजुटता जाहिर करने के साथ 15 अगस्त को भारत के स्वतंत्नता दिवस को काला दिवस के रूप में मनाया जाएगा. इसके बाद पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए तीन एयरस्पेस भी बंद कर दिए. पाकिस्तान की सिविल एविएशन अथॉरिटी द्वारा जारी नोटिस टू एयरमैन के मुताबिक, एयरस्पेस 6 अगस्त से 5 सितंबर तक के लिए बंद रहेंगे. सुरक्षा समिति में इस प्रकार का निर्णय लिया जाना बताता है कि पाकिस्तान किस तरह इस फैसले से हिल गया है.  

मोदी सरकार ने जब इतना बड़ा निर्णय किया तो उसने पाकिस्तान की संभावित प्रतिक्रियाओं और कदमों पर अवश्य विचार किया होगा. भारतीय विदेश मंत्नालय की पूरी नजर पाकिस्तान की गतिविधियों पर थी. पाकिस्तान का सफल होना कठिन है. ऑपरेशन ऑल आउट के कारण आतंकवादी ज्यादा कुछ नहीं कर पा रहे. अगर इमरान सरकार आतंकवाद को बढ़ावा देती है तो यहां उनका फन कुचला ही जाएगा, एफएटीएफ में हम उसे आराम से घेर सकते हैं. जहां तक अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचने की बात है तो एक दो देश उनके पक्ष में बयान दे दें उससे क्या अंतर आएगा? कोई देश भारत से बैर लेने की सीमा तक जा नहीं सकता. भारत ने इस कदम के बाद सुरक्षा परिषद के सभी सदस्यों को विस्तार से बता दिया कि यह उसका अंदरूनी मामला है. यूरोपीय संघ के देशों को भी यही कहा गया. सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के साथ प्रमुख मुस्लिम देशों से बात की गई.

हमारा विदेश मंत्नालय लगातार दुनिया के देशों के संपर्क में है. चीन ने अवश्य चिंता प्रकट की है लेकिन उसका आयाम अलग है. ओआईसी यानी इस्लामिक सहयोग संगठन यदि एकाध प्रस्ताव पारित भी कर दे तो उससे होगा क्या? वह पहले भी प्रस्ताव पारित करता रहा है. एयरस्पेस बंद करने से भी ज्यादा अंतर नहीं आएगा. बालाकोट हवाई बमबारी के बाद पाकिस्तान ने सारे एयरस्पेस बंद कर दिए थे और हमने आराम से उसका सामना किया. वैसे भी जब इतना साहसिक और ऐतिहासिक फैसला करते हैं तो उसकी तात्कालिक प्रतिक्रि याओं का सामना भी करना पड़ता है. पाकिस्तान की चुनौतियों से हमें निपटना होगा और उसकी तैयारी है. 

अब आइए व्यापार पर. भारत ने पुलवामा हमले के बाद मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा छीनकर उसके सामानों पर 200 प्रतिशत कर लगा दिया था. भारत सरकार ने हथियारों, मादक पदार्थो और अवैध नोटों की चल रही तस्करी की वजह से अप्रैल 2019 में पाकिस्तान के साथ क्रॉस एलओसी ट्रेड को भी निलंबित कर दिया था. 200 प्रतिशत कर लगाने के बाद पाकिस्तान से भारत में आयात इस साल मार्च में 92 प्रतिशत घटकर 28.4 लाख डॉलर का रहा. तो यह किसी तरह से चिंता का विषय है ही नहीं. इस तरह कुल मिलाकर पाकिस्तान के कदम से हमें परेशान होने की आवश्यकता नहीं. पड़ोसी से हम इसी तरह के बौखलाहट भरे व्यवहार की उम्मीद कर सकते हैं. मूल बात है कि हमें अपना घर ठीक रखना होगा. कश्मीर घाटी को हमने संभाल लिया तो पाक चीखने के अलावा कुछ नहीं कर सकता. संभव है उसकी बौखलाहट से पाक अधिकृत कश्मीर को लेकर भारत ठोस और निर्णायक कदम उठाने को मजबूर हो जाए.

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