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ब्लॉगः ‘अधूरे काम’ पूरे करने के लिए बाइडेन की दूसरी पारी की दावेदारी, क्या उम्र बनेगी बाधा?

By शोभना जैन | Updated: April 29, 2023 11:15 IST

घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर नित नई चुनौतियों से जूझ रहे अमेरिका और मतदाताओं के बीच उनकी बड़ी उम्र को लेकर चल रही ऊहापोह के बीच बाइडेन ने दूसरी पारी के लिए अपनी दावेदारी पेश की है। बाइडेन अमेरिकी इतिहास के सबसे उम्रदराज राष्ट्रपति हैं।

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अमेरिका की ‘आत्मा की रक्षा’ और ‘अधूरे काम को पूरा’ करने के एजेंडे के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने दूसरी बार राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के अपने फैसले की सार्वजनिक तौर पर घोषणा कर दी। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर नित नई चुनौतियों से जूझ रहे अमेरिका और मतदाताओं के बीच उनकी बड़ी उम्र को लेकर चल रही ऊहापोह के बीच बाइडेन ने दूसरी पारी के लिए अपनी दावेदारी पेश की है। बाइडेन अमेरिकी इतिहास के सबसे उम्रदराज राष्ट्रपति हैं। अगर वे  इस बार फिर से चुनाव जीतते हैं तो अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत करते वक्त वे 82 साल के होंगे और कार्यकाल खत्म होने तक उनकी उम्र 86 साल हो जाएगी।  

कंजर्वेटिव 76 वर्षीय डोनाल्ड ट्रम्प 2020 की शिकस्त के बाद एक बार फिर अपनी उम्मीदवारी पहले ही पेश कर चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों के जानकारों का कहना है कि ट्रम्प की तुनकमिजाजी  मतदाताओं के बीच काफी  चर्चा में रही। बाइडेन के पक्ष में सबसे बड़ी बात यह है कि उनके मुकाबले ट्रम्प हैं, जिनका कार्यकाल खासा उथल-पुथल भरा रहा और आगामी चुनावों से पूर्व एक बार फिर से वह लेखिका केरॉल के बलात्कार के आरोपों को लेकर अदालतों के चक्कर काट रहे हैं। वैसे, इस सबके बीच चिंतकों के बीच एक सवाल लगातार यह भी उभर रहा है कि दोनों दलों के इन दोनों वयोवृद्ध नेताओं के अलावा दोनों ही दल जनता के सम्मुख कोई नया करिश्माई नेता क्यों नहीं दे पा रहे हैं?

गौरतलब है कि 18 माह बाद अगले वर्ष नवंबर में देश में नए राष्ट्रपति का चुनाव होने वाला है। बाइडेन ने अपनी उम्मीदवारी पेश करते हुए एक वीडियो जारी किया जिसमें दिखाया गया है कि उनके राष्ट्रपति पद के शपथ ग्रहण करने से पूर्व 6 जनवरी 2021 को ट्रम्प समर्थकों की बेकाबू भीड़ ने सत्ता के केंद्र रहे कैपिटल हिल पर धावा बोल दिया था जिसके चलते वहां अराजक स्थिति पैदा हो गई थी।

बाइडेन अधूरे काम पूरे करने और अमेरिका की आत्मा की रक्षा के एजेंडे के साथ भले ही चुनाव मैदान में उतर रहे हैं लेकिन बढ़ती मुद्रास्फीति, अमीरों पर कर वृद्धि, सामाजिक सुरक्षा को स्थिर करना, बेरोजगारी से निपटना, स्वास्थ्य नीति खासकर महिलाओं के निजी अधिकारों के मद्देनजर स्वास्थ्य नीति, आव्रजन नीति को मानवीय नजरिये से हल करना और कोविड जैसे मुद्दों को हल करने के लिए सतत प्रयास के अलावा यूक्रेन युद्ध की नित नई चुनौतियों  से निपटने को लेकर अमेरिका की प्रभावी भूमिका जैसे तमाम सवाल हैं, जो कि अधूरे कामों में आते हैं। लेकिन अधूरे  कामों को पूरा करने के  लिए बाइडेन  की एक अहम चुनौती उनका उम्रदराज होना है।  

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