ऐसा लगता है कि चीन इस समय अपनी छवि सुधारने में लगा हुआ है. कोरोना महामारी सारे संसार में फैलाने का जो दोष उसके माथे मढ़ा गया है, वह उसकी सफाई में जुटा हुआ है.
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उद्धव ठाकरे निश्छल और साफ-सुथरी छवि वाले व्यक्ति हैं. राजनीतिक रूप से काफी हिम्मती हैं इसलिए उन्हें तो 'पेन ड्राइव बम' का कोई खौफ होना ही नहीं चाहिए. उन्हें आगे आकर जांच की घोषणा कर देनी चाहिए.
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रूस ने सुरक्षा परिषद में यूक्रेन को सहायता पहुंचाने का जो प्रस्ताव रखा है, उससे बड़ा क्रूर मजाक क्या हो सकता है? यदि रूस हमला नहीं करता या अब भी उसे बंद कर दे तो यह अपने आप में उसकी बड़ी कृपा होगी। भारत को अब सोचना पड़ेगा कि वह रूस का समर्थन कब तक कर
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अनुभवों से यह तो स्पष्ट है कि भारी-भरकम बजट, राहत, नलकूप जैसे शब्द जलसंकट का निदान नहीं हैं. करोड़ों-अरबों की लागत से बने बांध सौ साल भी नहीं चलते, जबकि हमारे पारंपरिक ज्ञान से बनी जल संरचनाएं ढेर सारी उपेक्षा, लापरवाही के बावजूद आज भी पानीदार हैं.
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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्नी पीयूष गोयल ने भारत के व्यापार-उद्योग में लगे लोगों की कार्यकुशलता, प्रामाणिकता और परिश्रम की जो प्रशंसा की है, वह उचित ही है।
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दरअसल संसद हो या सड़क, कोई रैली हो या मीडिया के सामने सवाल-जवाब की स्थिति, हर जगह जिन बातों को राहुल गांधी सीधे कर रहे हैं वो पारंपरिक सत्ताधारी कांग्रेसी कहीं कहते नहीं हैं। कहते भी हैं तो कुछ इस अंदाज में जैसे दिन के उजाले में कांग्रेस का हित साधते
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कोरोना काल में केंद्र सरकार ने गरीबों को मुफ्त अनाज देने की शुरुआत की। एक बड़ी शहरी आबादी इस योजना का उपहास की दृष्टि से देखती है। इस विषय पर पढ़ें रंगनाथ सिंह का ब्लॉग।
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सरकार को तेल और बिजली दोनों पर भारी ‘ऊर्जा सुरक्षा’ टैक्स आरोपित करना चाहिए. इनके दाम में भारी वृद्धि करनी चाहिए. ऊर्जा सुरक्षा स्थापित करने का दूसरे उपाय पर भी गौर करना चाहिए.
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