प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच एक खास केमिस्ट्री है, इसलिए ऐसा भरोसा किया जा सकता है कि वर्ष 2022 में मोदी-पुतिन केमिस्ट्री हिंद-प्रशांत क्षेत्र में कूटनीतिक लाभांश की हैसियत में होगी।
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ये ध्यान रखने की जरूरत है कि सबका साथ, सबका विकास की बात केवल नारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. हम इस हकीकत से आंख नहीं चुरा सकते हैं कि पिछले दो-तीन साल में करीब 84 प्रतिशत भारतीय परिवारों की आय कम हुई है.
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आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) विधेयक के संसद में पेश होते ही विपक्षी सांसदों ने इस पर हमला बोल दिया है. उनका कहना है कि इस तरह के पहचान-प्रमाण इकट्ठे करना मानव अधिकारों का हनन है.
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साल 2017 में शीर्ष पद के लिए रामनाथ कोविंद को चुनकर नरेंद्र मोदी ने देश को चौंका दिया था. कोविंद तब दौड़ में शामिल भी नहीं थे. इस बार भी कई नामों को लेकर अटकलें चल रही हैं.
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सूबे में मुस्लिमों की आबादी 18।5 के लिहाज से हालांकि, यह नंबर कम ही माने जाएंगे। बीते विधानसभा चुनावों की बात करें तो 17वीं विधानसभा में मुस्लिम विधायकों का प्रतिनिधित्व सिर्फ 24 सीटों पर था। इस चुनाव में जो मुस्लिम विधायक असेंबली में पहुंचे, उनमें
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नेशनल सैंपल सर्वे आफिस (एनएसएसओ) की ताजा 76वीं रिपोर्ट के मुताबिक देश में 82 करोड़ लोगों को जरूरत के मुताबिक पानी मिल रहा है. देश के महज 21.4 फीसदी लोगों को ही घर तक सुरक्षित जल उपलब्ध है.
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हर दस साल में की जाने वाली जनसंख्या की गिनती में करीब 20 लाख कर्मचारी जुटते हैं. इसमें छह लाख ग्रामों, पांच हजार कस्बों, सैकड़ों नगरों और दर्जनों महानगरों के रहवासियों के दरवाजे पहु्ंचकर जनगणना का काम करना जटिल होता है.
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भारत की स्वतंत्र विदेश नीति पंडित जवाहरलाल नेहरू के समय से चली आ रही है। अमेरिका को यह समझना होगा कि भारत जैसा विशाल लोकतंत्र ब्रिटेन या कुछ अन्य गोरे देशों की तरह उनका पिछलग्गू बनकर नहीं रह सकता.
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Assembly elections: उप्र में सपा और उत्तराखंड व गोवा में कांग्रेस को सत्ता में लाने के बजाय वोटरों ने सोचा कि क्यों न इनसे कुछ कम खराब पार्टी को ही दोबारा मौका दे दिया जाए.
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