कोविड-19 के बीच चीन के प्रति बढ़ी हुई वैश्विक नकारात्मकता और वर्ष 2022 में चीन में कोरोना संक्रमण के कारण उद्योग-व्यापार के ठहर जाने से चीन से बाहर निकलते विनिर्माण, निवेश और निर्यात के मौके भारत की ओर आने लगे हैं.
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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि भारत में कोरोना महामारी से 47 लाख लोगों की जान गई। ये आंकड़ा हैरान करने वाला है। भारत ने जो आधिकारिक आंकड़ा बताया है, उसके मुकाबले ये 10 गुना ज्यादा है।
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जिस देश की बुनियाद में सहिष्णुता हो, जिस देश ने ‘सर्वे भवंतु सुखिन:’ और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का सूत्र रचा वहां नफरत कैसे पनप सकती है. सृष्टि को बचाने के लिए भगवान शिव के विष पी लेने की पौराणिक मान्यता वाले देश में लोग दूसरों के प्रति इतने निर्दयी क्य
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स्वतंत्रता के यज्ञ में आहुति देने वाले वीर पूरब, पश्चिम, उत्तर, और दक्षिण हर ओर से आए थे। वे हर धर्म और जाति के थे और देश के साथ उनका लगाव उन्हें जोड़ रहा था। उनके सपनों का भारत एक समग्र रचना है।
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रवींद्रनाथ एशिया के पहले लेखक थे जिन्हें 109 साल पहले 1913 में साहित्य के लिए नोबल पुरस्कार मिला था। देश-विदेश की कई भाषाओं में रवींद्रनाथ की रचनाएं अनूदित हैं।
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खबर पालिका यानी अखबार, टीवी, सिनेमा, इंटरनेट आदि यदि स्वतंत्र नहीं हैं तो फिर वह लोकतंत्र खोखला है। लोकतंत्र की इस खूबी को नापनेवाली संस्था ‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ ने अपनी इस साल की रपट में बताया है कि भारत का स्थान 142 वां था।
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हिंदी देश की एकमात्र 'राष्ट्रभाषा' नहीं है, हमारी सारी भाषाएं 'राष्ट्रभाषाएं' हैं. इनमें हिंदी भी एक है - एकमात्र नहीं. हमें सब भाषाओं का सम्मान करना है.
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दुनिया आज कई चुनौतियों का सामना कर रही है। इसमें महामारी से लेकर युद्ध जैसे संकट शामिल है। इन सबके बीच पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने स्थितियों को ठीक से समझते हुए संतुलन कायम रखने में कामयाबी हासिल की है।
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यदि शहर में गर्मी की मार से बचना है तो अधिक से अधिक पारंपरिक पेड़ों को रोपना जरूरी है, साथ ही शहर के बीच बहने वाली नदियां, तालाब, जोहड़ आदि यदि निर्मल व अविरल रहेंगे तो बढ़ी गर्मी को सोखने में ये सक्षम होंगे।
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