देश में आम चुनावों के दौरान प्रमुख विपक्षी नेताओं की भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तारियां भारत के लोकतंत्र की गर्वित पहचान तो नहीं हो सकती। इन गिरफ्तारियों के पीछे केंद्रीय एवं राज्य सरकारों द्वारा सत्ता के दुरुपयोग के आरोप चिंताजनक हैं।
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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर नक्सलियों के गढ़ दंतेवाड़ा में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नक्सलियों से हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने की अपील करते हुए आश्वासन दिया था कि उनकी सरकार उनके साथ बातचीत के लिए तैयार है और वह हर जायज मांग को
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इस तनावपूर्ण स्थिति के भारत पर फौरी तौर पर पड़े असर का अगर जिक्र करें तो ईरान के सुरक्षा बलों ने होरमुज की खाड़ी के निकट गत 13 अप्रैल को एक इजराइली वाणिज्य जल पोत को बंधक बना लिया जिस पर कुल सवार 25 कर्मियों में से 17 भारतीय कर्मी शामिल हैं।
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सीरिया में वाणिज्य दूतावास पर हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बड़े पैमाने पर इजराइल पर ड्रोन और मिसाइलों से हमले किए. माना जा रहा है कि दोनों प्रमुख विरोधी देशों के बीच सालों से छद्म युद्ध के बाद यह पहली बार आमने-सामने की लड़ाई आरंभ हुई ह
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बाबासाहब बराबरी की बात करते थे तो उसमें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय तीनों निहित था। उनको पता था कि लोकतांत्रिक हिस्सेदारी के बिना वंचित तबकों की कहीं कोई सुनवाई भी नहीं होगी।
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पिछले दिनों संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में भी कहा गया है कि भारत में गरीबी 2015-2016 के मुकाबले 2019-2021 के दौरान 25 फीसदी से घटकर 15 फीसदी पर आ गई है।
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कम्प्यूटर के अपने लाभ हैं लेकिन नैसर्गिक कला का वह विकल्प नहीं हो सकता। खासतौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की आहट ने हमें यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि हमारी अगली पीढ़ियां कला को क्या समुचित रूप से जिंदगी का हिस्सा बना पाएंगी?
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आरक्षण आंदोलनों से जाति विशेष से प्रभावित छोटे दलों का प्रभाव विपरीत परिणाम भी दे सकता है. मजबूरी के हालात के चलते छोटे दलों को बड़े दलों की ओर से महत्व मिलना राजनीतिक जरूरत है।
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नेशनल मेडिकल कमीशन को ऐसी शिकायतें मिलती रहती हैं और उसकी ओर मेडिकल कॉलेजों को समय-समय पर सख्त हिदायतें भी दी जाती रहती हैं। नागपुर मेडिकल के नर्सिंग कॉलेज के एक विद्यार्थी द्वारा आत्महत्या किए जाने का मामला सामने आने के बाद एक बार फिर मेडिकल क्षेत्र
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जब गुरु गोविंद सिंह जी ने देखा कि उनके पिता गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान के बावजूद भी औरंगजेब पर कुछ असर नहीं पड़ रहा तथा उसके जुल्म एवं अत्याचार दिन-प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहे हैं, लोग लुक-छिप कर दिन व्यतीत कर रहे हैं
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