अपने भ्रामक विज्ञापनों के लिए जहां बाबा रामदेव को सुप्रीम कोर्ट की तीखी आलोचना और फटकार का सामना करना पड़ रहा है, वहीं न्यायाधीशों ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) को भी नहीं बख्शा है।
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लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान आरोप-प्रत्यारोप तो पहले भी होते रहे हैं, लेकिन अब इसमें अपने विरोधियों के खिलाफ ‘डीपफेक’ प्रौद्योगिकी का भी इस्तेमाल किया जाने लगा है, जो चिंताजनक है.
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वैक्सीन लेने वाले लोग भयभीत होने लगे हैं। लेकिन आशंकाएं दूर करने के लिए चिकित्सक फिर सामने आए हैं। उनका कहना है कि कोविशील्ड वैक्सीन लगवाने पर दस लाख में से सात लोगों को ही हार्टअटैक या ब्रेन हैमरेज हो सकता है।
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ऐसा कहा जाता है कि लोकसभा चुनावों के बाद, विधानसभा चुनाव जल्द कराने के प्रयास किए जाएंगे। सिन्हा या तो लोकसभा उम्मीदवार के रूप में वापसी कर सकते हैं या उम्मीद से जल्दी राज्यसभा में लाए जा सकते हैं।
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भारत की सभ्यता प्राचीन काल से कर्म-प्रधान रही है। कर्म से ही सृष्टि होती है। श्रम का विलोम होता है विश्राम। ऐतरेय ब्राह्मण में श्रम का बड़ा ही मनोरम चित्रण मिलता है।
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कहावत है कि जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है, वही सबसे पहले उसमें गिरता है। कनाडा के प्रधानमंत्री को वास्तविकता को समझना चाहिए और अपने तुच्छ राजनीतिक स्वार्थों के लिए अपने देश का नुकसान करने से बचना चाहिए।
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महाराष्ट्र ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन द्वारा पिछले 40 वर्षों में विभिन्न प्रकार के सम्मेलनों, परिसंवादों, कार्यशालाओं, चर्चासत्रों व मार्गदर्शन शिविरों का आयोजन किया गया है. इन सबकी वजह से अस्थिरोग विशेषज्ञों की विशेषज्ञता में निश्चित रूप से विकास हुआ है.
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Maharashtra Day 2024: सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 14 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में राज्य सबसे बड़ा योगदानकर्ता बना हुआ है.
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देश की सर्वोच्च पंचायत की यह सदस्य अपने ही शहर में जिला प्रशासन के अधिकारियों से प्रताड़ित होती रही और संविधान के रखवाले उपहास उड़ाते रहे। किसी भी सभ्य समाज के लिए यह शर्म की बात है।
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गाजा का मुद्दा बेहद गंभीर है लेकिन विश्वविद्यालयों के अंदर इस तरह के आक्रामक विरोध प्रदर्शनों के रूप में इसे उठाना सही नहीं है, वहीं दूसरी तरफ तर्क यह भी है कि विरोध के तरीके को पूरी तरह से भले ही सही न माना जाए लेकिन विरोध का मुद्दा तो सही है।
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