भारत छोड़ो आंदोलन को लेकर इसके पहले काफी मंत्रणा तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष मौलाना अबुल कलाम आजाद के नेतृत्व में हुई थी. आंदोलन की भूमिका 5 जुलाई 1942 को वर्धा में गांधीजी से विचार मंथन के बाद बनी. बाद में 7 जुलाई और 14 जुलाई, 1942 को कांग्रेस कार्यसम
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Maharashtra Assembly Elections 2024: मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस, अजित पवार से लेकर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे अपने बेटे आदित्य ठाकरे के साथ तीन दिन तक दिल्ली में ताल ठोंक चुके हैं.
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यह नारा था अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोही आदिवासी जननायकों का, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत, महाजनी प्रथा और अंग्रेजों द्वारा नियुक्त किए गए सामंतों के शोषण के खिलाफ एक निर्णायक लड़ाई लड़ी. लेकिन देश की आजादी के 75 साल बाद भी भारत के लगभग 700 आदिवासी
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जातिगत आरक्षण की शुरुआत लगभग 125 साल पहले हुई। अनुसूचित जातियों और जनजातियों की दुर्दशा को देखते हुए संविधान निर्माताओं ने कार्यपालिका एवं विधायिका में प्रतिनिधित्व की व्यवस्था की, जो एक अस्थायी प्रावधान था और उसकी अवधि दस वर्ष थी।
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पहलवान विनेश फोगाट पेरिस में चल रहे ओलंपिक में देश की तरफ से खेल रही थीं और फाइनल मैच से पहले उनका वजन तय मानकों से 100 ग्राम अधिक पाए जाने के कारण उन्हें आगे खेलने से मना कर दिया गया. इस बढ़े हुए वजन को कम करने के लिए विनेश और उनके साथ की पूरी टीम न
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कुछ शहरों में करोड़ों रुपए की लागत वाली मेट्रो रेल लाइनों के बारे में भी यही कहानी है, जबकि वास्तव में इनकी जरूरत ही नहीं थी। तथाकथित सिटी मास्टर प्लान कागजों तक ही सीमित रह गए हैं और ठेकेदारों का हित साधने वाली योजनाओं ( मेट्रो आदि) को नौकरशाही ने आ
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टाटा ग्रुप को ईस्ट इंडिया कंपनी जैसा बताने वाले भूल गए थे कि टाटा ग्रुप भारत से बाहर दर्जनों देशों में स्वच्छ, स्वस्थ और पारदर्शितापूर्ण कारोबार करता है। वहां पर तो उस पर कभी कोई आरोप नहीं लगाता।
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कट्टरपंथी ताकतों के आंदोलन पर हावी हो जाने के कारण ही उसने हिंसक रूप धारण कर लिया और शेख हसीना के देश से पलायन के बाद हिंदू समुदाय को निशाना बनाना शुरू कर दिया.
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