अब भारत उस दौर से निकल कर एक ऐसे समय में आ पहुंचा है, जहां वह दुनिया का पेट भर रहा है. यह देश में खाद्य अधिशेष (खपत से ज्यादा खाद्यान्न की पैदावार) के कारण हुआ.
...
जांच में पता चला है कि इनमें से कई अपराध 16-18 वर्ष की आयु के किशोरों द्वारा किए जाते हैं। सामूहिक बलात्कार, बलात्कार, डकैती, हत्याएं ही नहीं, बल्कि महंगी कारों में किशोरों द्वारा तेज गति से वाहन चलाने तथा नशे में धुत होकर निर्दोष पैदल यात्रियों या द
...
सामाजिक-आर्थिक सीढ़ी पर जातियां अलग-अलग पायदान पर स्थित होती हैं और सबका अपना-अपना दायरा होता है. आज जाति की शक्ति की कोई उपेक्षा नहीं कर सकता, खास तौर पर राजनीति के क्षेत्र में तो ऐसा सोचना अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है.
...
वायुसेना के एमआई-17 और चिनूक हेलिकॉप्टर की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। हालांकि विजिबिलिटी कम होने की वजह से हेलिकॉप्टरों को उड़ान भरने में बाधा आ रही है, इसके बावजूद बाधाओं को पार करते हुए यात्रियों को बाहर निकाला जा रहा है।
...
हिंदी या भारतीय भाषाओं के जरिये न्याय हासिल करने की राह में सबसे बड़ी बाधा संविधान के अनुच्छेद 348 की व्यवस्था है, जिसके तहत अगर संसद कानून नहीं बनाती तो हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट अंग्रेजी में ही सुनवाई करेंगे।
...
कहते हैं कमान से निकला हुआ तीर और जबान से निकला हुआ शब्द वापस नहीं होता। किसी शब्द को असंसदीय या संसदीय घोषित करने से बात बनती नहीं है। कोई शब्द यदि निश्चित रूप से अनुचित है तो उसे बोलने वाले को यह अहसास होना चाहिए कि उससे गलती हुई है।
...
संक्षेप में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा को अधिक जिम्मेदारी से काम करना चाहिए, उदार होना चाहिए और दरियादिली दिखानी चाहिए। यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि ऐसा न होना दोनों तरफ से नुकसानदेह है।
...
ट्रम्प की ये बातें क्या संदेश देती हैं? क्या अमेरिका में सबकुछ ठीक चल रहा है? लोकतंत्र भी? फिलहाल ट्रम्प भले ही तानाशाही की ओर बढ़ते दिख रहे हों लेकिन अभी उनका पापुलैरिटी ग्राफ ठीकठाक है, हालांकि कमला हैरिस की एंट्री से ट्रम्प की बढ़त पर विराम लग गय
...
हमास के शीर्ष नेता इस्माइल हनियेह के ईरान की राजधानी तेहरान में एक हमले में मारे जाने और उसके बाद के घटनाक्रम से पश्चिम एशिया में चल रहे घमासान में एक नया भयावह अध्याय शुरू होने की आशंका है.
...