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ब्लॉगः वैज्ञानिकों की लगन और मेहनत से असंभव को संभव होना ही था

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: August 25, 2023 11:01 IST

सीमित संसाधन और सीमित बजट जैसी कई सीमाओं के बावजूद जिस लगन और समर्पण से इसरो के वैज्ञानिक अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए दिन-रात जुटे रहे, उससे असंभव को संभव तो होना ही था। पिछली विफलता पर प्रधानमंत्री ने यह कहकर सभी का हौसला बढ़ाया था कि वयम्‌ अमृतस्य पुत्राः, हमें सबक लेना है, पीछे मुड़कर नहीं देखना है। और ऐसा ही हुआ भी।

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इसरो के वैज्ञानिकों ने चंद्रमा की सतह पर चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम को लैंड कराने में सफलता हासिल कर इतिहास रच दिया। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचनेवाला भारत दुनिया का पहला देश बन गया है। इस सफलता से भारतीय वैज्ञानिकों का मनोबल भी बढ़ा है। दुनिया में उनकी ताकत और बढ़ेगी। सभी जानते हैं कि भारत ने वर्ष 2019 में चंद्रयान-2 मिशन के तहत चंद्रमा पर लैंडर को उतारने का प्रयास किया था। आखिरी क्षणों में उसकी लैंडिंग क्रैश हो गई थी। वैज्ञानिकों को निराशा हाथ लगी। लेकिन उन्होंने इस विफलता से सबक सीखे और चार साल के भीतर तीसरे चंद्र मिशन में सफल रहे। चंद्रयान-3 मिशन इसरो के लिए चुनौतीपूर्ण था। खासतौर पर चंद्रयान-2 की विफलता को देखते हुए। लेकिन इसरो के वैज्ञानिकों ने पिछली विफलता के हर पक्ष का इतनी बारीकी से अध्ययन किया और उन कमियों को दूर किया कि इस बार वे अपनी सफलता को लेकर पूरी तरह आश्वस्त थे।

भारत को अंतरिक्ष क्षेत्र में यह ऐतिहासिक उपलब्धि ऐसे समय मिली है जब कुछ दिन पहले रूस का अंतरिक्ष यान ‘लूना-25’ चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने के मार्ग में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। आज पूरा देश चंद्रयान-3 की सफलता के जश्न में डूबा हुआ है। चंद्रयान-3 की यह सफलता कई मायनों में अहम है। इसरो की इस कामयाबी से अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत की स्थिति बहुत मजबूत हो गई है। चंद्रयान-3 मिशन को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है इसमें इस्तेमाल की गई अधिकांश तकनीक और उपकरणों का निर्माण भारत में हुआ है। यह अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को दर्शाता है। इससे दुनिया के अन्य देशों में भारत की तकनीक और भारत के उपकरणों को लेकर विश्वसनीयता बढ़ेगी। वैसे भी, इसरो को दुनिया भर में अपने किफायती अभियानों के लिए जाना जाता है।

सीमित संसाधन और सीमित बजट जैसी कई सीमाओं के बावजूद जिस लगन और समर्पण से इसरो के वैज्ञानिक अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए दिन-रात जुटे रहे, उससे असंभव को संभव तो होना ही था। पिछली विफलता पर प्रधानमंत्री ने यह कहकर सभी का हौसला बढ़ाया था कि वयम्‌ अमृतस्य पुत्राः, हमें सबक लेना है, पीछे मुड़कर नहीं देखना है। और ऐसा ही हुआ भी। भारत की इस सफलता के बाद उसका अगला कदम क्या होगा, इस पर देश-दुनिया की नजरें टिकी रहेंगी। तो, इसरो ने अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं कि चंद्रयान-3 के बाद वह सूर्य की खोज के लिए आदित्य मिशन लॉन्च करनेवाला है। इसके साथ ही वह गगनयान की तैयारियों पर भी जोर-शोर से लगा हुआ है। इस सफलता ने इसरो के हौसले बुलंद किए हैं, देशवासियों को भी गर्व से भर दिया है। इसरो की इस ऐतिहासिक सफलता ने देश को आश्वस्त किया है कि भारत के सपनों और महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने में कोई बाधा रुकावट नहीं बन सकती।

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