लाइव न्यूज़ :

‘कई चांद सरे आसमां’, विलियम स्लीमन और नर्मदा के डायनासोर

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: March 10, 2026 05:26 IST

किशनगढ़ की राधा के लिए प्रख्यात ‘किशनगढ़ चित्रकला’ के चितेरे की यह कहानी 18वीं सदी के राजपूताने से शुरू होती है और 19वीं सदी में दिल्ली के लाल किले पर खत्म होती है.

Open in App
ठळक मुद्देआसामियों को लूटने के बाद रूमाल से हत्या कर दफना देता था.मुखिया सालभर लूट-डकैतियों-बलि की योजना बनाते थे.कंपनी की ‘सरकार’ को सुझाव दिया कि कई जनजातियों पर निगरानी रखी जाए.

सुनील सोनी

हिंदुस्तानी जुबान का 21वीं सदी का महान उपन्यास ‘कई चांद थे सरे आसमां’ जब 2010 में छपा, तो भारतीय महाद्वीप के साहित्य संसार में धूम मच गई. फारुकी साहब ने अंग्रेजी में इसका तर्जुमा ‘द मिरर ऑफ ब्यूटी’ नाम से खुद किया. धूम अभी भी मची हुई है, क्योंकि देवनागरी लिप्यांतरण के साथ कई भाषाओं में अनुवाद साल दर साल आ रहे हैं.

उपन्यास का शीर्षक अहमद मुश्ताक की गजल के दूसरे शे’र से है :

‘‘कई चांद थे सरे आसमां कि चमक-चमक के पलट गएन लहू मेरे ही जिगर में था न तुम्हारी ज़ुल्फ सियाह थी...’’

यह उपन्यास अंतिम मुगल बादशाह बहादुरशाह जफर के वंशज दाग देहलवी की मां वजीर खानम की कहानी है. देहलवी ने कहा था : ‘‘उर्दू है जिस का नाम हमीं जानते हैं दाग़ / हिन्दोस्तां में धूम हमारी ज़बां की है...’’ ‘बनी-ठनी’ या किशनगढ़ की राधा के लिए प्रख्यात ‘किशनगढ़ चित्रकला’ के चितेरे की यह कहानी 18वीं सदी के राजपूताने से शुरू होती है और 19वीं सदी में दिल्ली के लाल किले पर खत्म होती है.

लेकिन, यह उपन्यास उन कुख्यात ठगों का भी जिक्र करता है, जिन्हें विलियम स्लीमन ने 1830 से 1849 के बीच लगभग खत्म कर दिया था. स्लीमन की किताब ‘रामसीना’ में न केवल ठगों का पूरा ब्यौरा मिलता है, बल्कि यह भी कि कैसे ‘रामसी’ समेत कई सांकेतिक बोलियों से वे शिकारों को फांसते थे.

उनके दोस्त फिलिप मीडोज टेलर ने 1839 में उस जमाने का बेस्टसेलर उपन्यास ‘कन्फेशंस ऑफ ए ठग’ लिखा. यह कुबूलनामा ठग संप्रदाय के एक मुखिया अमन सूबेदार का है, जिसका वृहद किंतु असंगठित गिरोह नागपुर-सिवनी-जबलपुर-कटनी-इलाहाबाद-मिर्जापुर-दिल्ली तक फैला था और जो आसामियों को लूटने के बाद रूमाल से हत्या कर दफना देता था.

इसमें फिरंगिया उर्फ सैयद अमीर अली की भी झलक है. स्लीमन ने पहले ये रहस्यमय बोलियां सीखीं, सूबेदार और फिरंगिया को मुखबिर बनाया और फिर ठगों का खात्मा शुरू किया. स्लीमन ने रिपोर्टों में लिखा कि कैसे मिर्जापुर में विंध्यवासिनी देवी के मेले में ठग जुटते थे और उनके मुखिया सालभर लूट-डकैतियों-बलि की योजना बनाते थे.

1837 में आए एडवर्ड थॉर्नटन के उपन्यास ‘इलस्ट्रेशंस ऑफ द हिस्ट्री एंड प्रैक्टिसेस ऑफ द ठग्स’ में ‘रामसी’ बोली का जिक्र है. 1839 में अमेरिका में यह नए शीर्षक ‘हिस्ट्री ऑफ द ठग्स ऑर फांसिगर्स ऑफ इंडिया’ से बेस्ट सेलर बनी. यही स्लीमन थे, जिन्होंने 1855 में भारत पर राज कर रही ईस्ट इंडिया कंपनी की ‘सरकार’ को सुझाव दिया कि कई जनजातियों पर निगरानी रखी जाए.

इसी सिफारिश का नतीजा 1871 का कुख्यात आपराधिक जनजाति अधिनियम था. स्लीमन के नाम ‘रैम्बलिंग्स एंड रिकलेक्शंस ऑफ एन इंडियन ऑफिशियल’ भी है, जिसमें उन्होंने 1828 में जबलपुर में नर्मदा घाटी के ‘लम्हेटा फॉर्मेशन’ में डायनासोर के जीवाश्मों की खोज की पुष्टि की.

इसे 1877 में ‘टाइटनोसॉरस इंडिकस’ कहा गया, पर 20वीं सदी के आखिर में हुए शोध से साबित हुआ कि यह क्रेटेशियस काल के ‘राजसोरस नर्मडेंसिस’ के जीवाश्म हैं. गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौजी की आज्ञा पर स्लीमन ने 1849 से 1850 के दौरान अवध का व्यापक भ्रमण किया और इस सफरनामे को 1852 में ‘किंगडम ऑफ अवध’ के रूप में दर्ज किया.

स्लीमन की ही रिपोर्ट को आधार बनाकर वाजिद अली शाह के अवध पर ईस्ट इंडिया कंपनी ने कब्जा कर लिया. लेकिन, इसी रिपोर्ट में भेड़ियों के पाले-पोसे छह बालकों के वृत्तांत भी हैं. यह वृत्तांत ‘एन अकाउंट ऑफ वुल्व्स नर्चरिंग चिल्ड्रन इन देयर डेंस’ नाम से इलाहाबाद से निकलनेवाले ‘द पायोनियर’ समेत कई अखबारों में और बाद में पुस्तकाकार प्रकाशित हुए.

19वीं और 20वीं सदी में ‘भेड़िया बालकों’ के 50  मामले सामने आए, पर 1860 में बुलंदशहर की गुफा से मिला छह साल का ‘दीना शनीचर’ उल्लेखनीय है, जो आगरा के पास सिकंदरा अनाथालय में 28 साल रहने के बावजूद कभी बदल नहीं पाया, न ही इनसानी भाषा सीख पाया.

रुडयार्ड किपलिंग ने संभवत: इलाहाबाद में रिपोर्टर के रूप में काम करते हुए ‘द पायोनियर’ के अभिलेखागार में स्लीमन की वे रिपोर्ट पढ़ी होंगी, जिससे 1894 के उपन्यास ‘द जंगल बुक’ में ‘मोगली’, ‘शेरखान’, ‘बघीरा’ और ‘बल्लू’ के साथ सिवनी-नागपुर के पेंच अभयारण्य की ‘मोगलीलैंड’ किंवदंती का जन्म भी हुआ. स्लीमन की ही रिपोर्ट हैं, जिनमें सतपुड़ा के जंगल भी हैं और वैनगंगा भी.

टॅग्स :दिल्लीहिंदी साहित्य
Open in App

संबंधित खबरें

भारतघायल हूं इसलिए घातक हूं?, राघव ने एक्स पर किया पोस्ट, मैं बोलना नहीं चाहता था, मगर चुप रहता तो बार-बार दोहराया गया झूठ भी सच लगने लगता, वीडियो

भारतLPG Cylinder Update: सिलेंडर के लिए अब लंबी वेटिंग खत्म! दिल्ली में बस ID कार्ड दिखाओ और 5KG सिलेंडर पाओ

भारतदिल्ली और उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों में महसूस हुए भूकंप के झटके, अफगानिस्तान में आया भूकंप

भारतजो डर गया, समझो मर गया?, सौरभ भारद्वाज ने राघव चड्ढा पर निशाना साधा, कहा- केजरीवाल गिरफ्तार हुए तो विदेश में छिपा?

भारतस्वाति मालीवाल के बाद राघव चड्ढा पर गाज?, आखिर क्यों केजरीवाल के खास लोग छोड़ रहे साथ?

भारत अधिक खबरें

भारत'Three Allegations, Zero Truth': आम आदमी पार्टी द्वारा राज्यसभा की भूमिका से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा का जवाब

भारतMadhya Pradesh: अनूपपुर ज़िले में चार-मंज़िला होटल गिरने से मलबे में कई लोगों के फँसे होने की आशंका, एक की मौत

भारततमिलनाडु चुनावों के लिए BJP का टिकट न मिलने के बाद अन्नामलाई ने दिया अपना स्पष्टीकरण

भारतलखनऊ सहित यूपी के 17 शहरों में कूड़े का अंबार?, मतदान करने असम गए हजारों सफाईकर्मी, 12 अप्रैल को लौंटेगे?

भारतबारामती विधानसभा सीटः सुनेत्रा पवार के खिलाफ प्रत्याशी ना उतारें?, सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा- निर्विरोध जिताएं, सभी दलों से की अपील