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लद्दाख की ठंडी हवा में राजनीतिक सरगर्मी

By शशिधर खान | Updated: March 25, 2026 05:25 IST

सोनम वांगचुक की रिहाई छह महीने बाद उस समय हुई, जब उनकी पत्नी गीतांजलि एंग्मो की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं पर सुनवाई समाप्त करने की तारीख शीर्ष कोर्ट ने तय कर दी.

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ठळक मुद्देएनएसए की विभिन्न धाराएं लगाकर वांगचुक को जोधपुर सेंट्रल जेल ले जाकर बंद कर दिया गया.गृह मंत्रालय ने उसी वीडियो को आधार बनाकर वांगचुक के खिलाफ एनएसए लगाया था.जजों ने स्वीकारा कि इस मामले को निबटाने में बहुत देर हो चुकी है, अब और नहीं होगी.

जलवायु कार्यकर्ता से राजनीतिक कार्यकर्ता बने लद्दाख के बहुचर्चित समाजवादी सोनम वांगचुक की जोधपुर सेंट्रल जेल से रिहाई में एक ओर जहां इस पहाड़ी क्षेत्र की हवा थोड़ी सामान्य हुई है, वहीं दूसरी ओर कुछ नए सवाल भी खड़े हुए हैं. अंतरराष्ट्रीय मैग्सेसे पुरस्कार विजेता सोनम वांगचुक के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा एक्ट (एनएसए), 1980  के अंतर्गत दर्ज मामला वापस लेने और उन्हें जोधपुर जेल से रिहा करने का आदेश केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 14 मार्च को जारी किया. उन्हें 26 सितंबर 2025 को लद्दाख में राज्य दर्जा आंदोलन को लेकर हुए प्रदर्शनों के दौरान कथित रूप से हिंसा उकसानेवाले भाषणों के आरोप में लेह में गिरफ्तार किया गया था. एनएसए की विभिन्न धाराएं लगाकर वांगचुक को जोधपुर सेंट्रल जेल ले जाकर बंद कर दिया गया.

सोनम वांगचुक की रिहाई छह महीने बाद उस समय हुई, जब उनकी पत्नी गीतांजलि एंग्मो की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं पर सुनवाई समाप्त करने की तारीख शीर्ष कोर्ट ने तय कर दी. 10 मार्च को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार और पी. बी. वराले की पीठ के सामने गीतांजलि एंग्मो ने खुद उपस्थित होकर कहा कि सोनम वांगचुक के भाषण के जो शब्द भड़काऊ बताकर प्रदर्शन के वीडियो फुटेज में रिकार्ड किए गए हैं, वो उनके पति के मुंह से निकले हुए नहीं हैं. गृह मंत्रालय ने उसी वीडियो को आधार बनाकर वांगचुक के खिलाफ एनएसए लगाया था.

वांगचुक की पत्नी शुरू से ही सुप्रीम कोर्ट को बता रही हैं कि 24 सितंबर 2025 के विरोध प्रदर्शन का जो वीडियो गृह मंत्रालय की ओर से एटाॅर्नी जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में पेश किया है, उसमें वांगचुक के खिलाफ निराधार आरोप लगाए गए हैं और उनके भाषणों को तोड़मरोड़कर मनगढ़ंत बातें जोड़कर दिखाई गई हैं. सुप्रीम कोर्ट पीठ ने 10 मार्च को साफ शब्दों में कह दिया कि 17 मार्च को अंतिम सुनवाई होगी और फैसला उस दिन रिजर्व रख लिया जाएगा. दोनों जजों ने स्वीकारा कि इस मामले को निबटाने में बहुत देर हो चुकी है, अब और नहीं होगी.

केंद्र सरकार ने 17 मार्च करीब आने से पहले ही सोनम वांगचुक के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के अंतर्गत दर्ज मामला खत्म करके उन्हें रिहा कर दिया. 14 मार्च को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वांगचुक के खिलाफ एनएसए हटाने और उनकी रिहाई का आदेश जारी कर दिया. एक्टिविस्ट वांगचुक के मुक्त होने के दो ही दिन बाद 14 मार्च को लद्दाख में लगभग छह महीने से कूल पड़ी हवा में गर्मी आ गई. लेह और कारगिल दोनों जिलों में विशाल रैलियां निकाली गईं जिसमें भारी जनसमूह उमड़ा.

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