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ब्लॉगः गुजरात चुनाव में आप ने कांग्रेस को डुबोकर रख दिया, भाजपा को रिकार्डब्रेक जीत दिलवा दी

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: December 9, 2022 09:21 IST

कांग्रेस की स्थिति को इस चुनाव ने इतना बुरा कर डाला है कि अगले चुनाव में यदि आप उसे और ज्यादा नुकसान पहुंचाए तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। दरअसल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का भरोसा इतना टूट गया है कि अब कोई भी संगठनात्मक स्तर पर मेहनत करने को ही तैयार नहीं है।

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सौराष्ट्र को हमेशा से कांग्रेस का गढ़ समझा जाता रहा है। 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को यहां से बड़ी सफलता मिली थी। लेकिन इस बार अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (आप) ने उसकी लुटिया डुबोकर रख दी है। आप की ओर से मुख्यमंत्री पद के घोषित उम्मीदवार इसुदान गढ़वी ने सौराष्ट्र में ही आने वाले देवभूमि द्वारका जिले की खंभालिया सीट से मोर्चा संभाला था। उस वक्त ही यह साफ हो गया था कि आम आदमी पार्टी, कांग्रेस के परंपरागत मतदाताओं को लुभाने की कोशिश में जुट गई है। आज जब परिणामों की घोषणा हो गई है तो यह स्थिति और भी स्पष्ट हो गई है। आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के परंपरागत कोली, अहीर समुदाय के वोट बैंक में सेंध लगाते हुए त्रिकोणीय मुकाबले में भारतीय जनता पार्टी को रिकार्डब्रेक जीत दिलवा दी है।

सौराष्ट्र में महंगाई, बेरोजगारी जैसे मुद्दे दिखाई देते थे। लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने यहां काफी पहले से ही इन मुद्दों पर स्थानीय मुद्दे हावी करने की रणनीति बनाकर चुनावी जीत सुनिश्चित करने की कोशिश शुरू कर दी थी। उसने पिछले चुनाव में विजयी रहे कांग्रेस के ऐसे विधायकों को अपने पाले में मिला लिया था, जो अपने-अपने इलाके में दबदबा रखते थे। इसके अलावा उसने पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी जैसे नेताओं की टिकट भी काट दी थी। सौराष्ट्र में चर्चा थी कि बतौर मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की छवि खराब हो गई है। ऐसे में भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री की ही टिकट काट कर यह संदेश दे दिया था कि सौराष्ट्र में वह हर हाल में जीत दर्ज करना चाहती है।

इस बार के चुनाव में कांग्रेस की निष्क्रियता और आप की सक्रियता के कारण भारतीय जनता पार्टी की बल्ले-बल्ले संभव हो सकी। चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा के नेताओं ने जहां कांग्रेस को टार्गेट किया था, वहीं आप की उपेक्षा की थी। भाजपा जानती थी कि पंजाब और दिल्ली की तरह ही आम आदमी पार्टी यहां पर कांग्रेस को ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाली साबित होगी। ऐसे में यदि भाजपा ने भी उसे हवा दी तो यह दांव उलटा पड़ जाएगा।

कांग्रेस की स्थिति को इस चुनाव ने इतना बुरा कर डाला है कि अगले चुनाव में यदि आप उसे और ज्यादा नुकसान पहुंचाए तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। दरअसल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का भरोसा इतना टूट गया है कि अब कोई भी संगठनात्मक स्तर पर मेहनत करने को ही तैयार नहीं है। वह जानता है कि संगठन के बगैर उम्मीदवार कितनी भी मेहनत करे, परिणाम नहीं मिलेगा। गुजरात को हिंदुत्व की प्रयोगशाला कहा जाता है। इस चुनाव में यह बात एक बार फिर साबित भी हो गई कि गुजरात में भाजपा को हराने के लिए विपक्ष को कुछ नया दांव-पेंच अपनाना होगा।

वैसे, जाते-जाते यह बता दें कि सोमनाथ में इस बार भी भाजपा को फतह हासिल नहीं हुई है। पता नहीं क्यों वहां उसका हर दांव विफल हो जाता है।

नंदकिशोर पुरोहित

टॅग्स :गुजरात विधानसभा चुनाव 2022आम आदमी पार्टीकांग्रेसBJP
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