BMC Results 2026: बीएमसी, नागपुर, छत्रपति संभाजी नगर, पुणे सहित महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं के लिए गुरुवार को मतदान हो चुका है. आज शुक्रवार को मतगणना होगी और दोपहर बाद नतीजे भी आ जाएंगे. जीत किसकी होगी और कौन विजय का स्वाद नहीं चख पाएगा, यह राजनीतिक दलों और उनके उम्मीदवारों के हितों से जुड़े सवाल हैं. इस सबसे अलग आम जनता के लिए तो महत्वपूर्ण बात यह है कि शहरों में उनकी आवाज गूंजने का वक्त फिर आ गया है. इसे विडंबना ही कह सकते हैं कि पांच महानगरपालिकाओं का कार्यकाल 2020 में और 18 महानगरपालिकाओं का कार्यकाल 2022 में ही समाप्त हो चुका था मगर कुछ उलझनों के कारण चुनाव नहीं हो पाए. जाहिर सी बात है कि जब निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की सत्ता नहीं होती है तो शासन के सारे सूत्र अधिकारियों के हाथों में आ जाते हैं.
शहरों के विकास में निश्चय ही अधिकारी भी अच्छी भूमिका निभाते हैं लेकिन गली-मोहल्लों की छोटी से छोटी समस्याओं से पूरी तरह परिचित हों, यह जरूरी नहीं है. इसका सीधा असर विकास कार्यों पर पड़ता है. आम आदमी के लिए यह संभव नहीं होता कि वह वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच बनाए और अपना काम करवाए. कहीं न कहीं सामंजस्य का अभाव नजर आता है.
मगर अब सारी उलझनों को पीछे छोड़ कर शहरों के विकास में आम आदमी की भूमिका का वक्त फिर से आ गया है. अब लोग सीधे-सीधे अपने पार्षद को पकड़ सकेंगे और यह सवाल पूछ सकेंगे कि उनके इलाके में फलां काम क्यों नहीं हुआ? निर्वाचित प्रतिनिधि जिम्मेदारी से भाग नहीं सकता क्योंकि जनता के वोट से ही उसे ये जिम्मेदारी मिली है.
इसलिए उम्मीद की जानी चाहिए कि शहरों के विकास में आम आदमी का नजरिया फिर से शामिल होने जा रहा है. एक बात का खास तौर पर ध्यान रखना बहुत आवश्यक है कि जो भी सत्ता में आए, उसे पूरे शहर को अपना मान कर चलना होगा. यदि किसी वार्ड में विपक्षी उम्मीदवार जीत कर आया है तो उसके साथ कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए.
लोकतंत्र की खूबी यही है कि चाहे कोई भी जीते, सत्ता आम आदमी की होती है. इसलिए अब उम्मीद की जा रही है कि महानगरपालिका के लिए चुने गए प्रतिनिधि विकास की नई धारा प्रवाहित कर पाएंगे. उम्मीद पर दुनिया टिकी है, इसलिए उम्मीद का साथ कभी मत छोड़िए.