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ब्लॉग: शिक्षा के साथ कौशल विकास का प्रशिक्षण भी जरूरी

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: December 6, 2024 06:44 IST

आज बेरोजगार आबादी का एक बड़ा हिस्सा उच्च शिक्षित युवाओं का है.

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जोधपुर में 16वें प्रकृति अंतरराष्ट्रीय वृत्तचित्र फिल्म महोत्सव के शुभारंभ के मौके पर राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कहा कि शिक्षा के साथ कौशल विकास का प्रशिक्षण भी जरूरी है. शिक्षा और अकादमिक के अलावा, छात्रों को कुछ ऐसे कौशल से लैस होना चाहिए जो उनकी जीवन यात्रा में उनकी सहायता करें. छात्रों के भीतर विभिन्न तरह के कौशल उनके करियर के विकास के साथ-साथ सफलता के लिए भी विकसित किए जाने जाने चाहिए.

दरअसल, जहां शिक्षा आधारभूत ज्ञान प्रदान करती है, वहीं कौशल विकास का उद्देश्य उस ज्ञान को व्यवहार में उतारना है. ये कौशल तकनीकी या गैर-तकनीकी हो सकते हैं, जो कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग से लेकर नेतृत्व और संचार तक हो सकते हैं. यह अच्छी बात है कि बौद्धिक, सामाजिक, आर्थिक परिवर्तन और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के हिसाब से हमारी राष्ट्रीय शिक्षा नीति में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को लागू किया जा रहा है.

कौशल विकास का उद्देश्य रोजगारोन्मुख शिक्षा प्रदान करना तथा विद्यार्थियों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना है. शिक्षा में कौशल विकास बच्चों को ग्रेड और अकादमिक से ऊपर उठकर सोचने का मौका देता है और उन्हें अपनी क्षमता को विकसित करने का मौका देता है. इससे उन्हें मनचाही नौकरी मिल सकती है या उन्हें एक संतुलित कार्य जीवन बनाने में मदद मिलती है.

इससे बच्चों में आत्मविश्वास भी बढ़ता है. इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर भारत सरकार ने स्किल इंडिया नामक एक पहल भी शुरू की है. जहां एक ओर सफल जीवन के लिए शिक्षा और अध्ययन महत्वपूर्ण हैं, वहीं दूसरी ओर छात्रों को ऐसे कौशल की भी आवश्यकता होती है जो उन्हें संकट और समस्याओं के दौरान जीवन में आगे बढ़ने में मदद कर सकें.

अनुशासन, समय प्रबंधन, जीवन कौशल यदि स्कूल स्तर पर दिए जाएं तो विद्यार्थियों के भविष्य की राह आसान हो सकती है. यह छात्रों को स्वतंत्र विचारक बनने में मदद करता है और उन्हें अपने भविष्य की योजना बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है.

चूंकि भारत में स्कूल मुख्य रूप से अकादमिक-केंद्रित हैं, इसलिए पाठ्यक्रम के माध्यम से कौशल विकास को शामिल करना आवश्यक है. यह छात्रों को उनकी पाठ्यपुस्तकों के बाहर की दुनिया को जानने और समझने में मदद करता है. यह उन्हें कम उम्र में ही स्वतंत्र रूप से सोचने और चुनाव करने की आजादी भी देता है. वास्तव में, हर किसी में जन्मजात कौशल होता है जिसे निखारने की आवश्यकता होती है. और ऐसे अन्य कौशल भी हैं जिन्हें सफल जीवन और करियर के लिए छात्रों में विकसित करने की आवश्यकता होती है.

इन कौशलों को केवल शिक्षा द्वारा ही निखारा जा सकता है जो प्रत्येक छात्र को सही दिशा में ले जा सकती है. कौशल प्रशिक्षण स्कूल स्तर पर छात्रों के लिए एक मजबूत आधार बनाने में मदद करता है. आज बेरोजगार आबादी का एक बड़ा हिस्सा उच्च शिक्षित युवाओं का है.

इनमें कौशल की कमी है, जिस वजह से वे रोजगार पाने में असफल रहते हैं. इसलिए कौशल विकास अब युवाओं को सशक्त बनाने, उनकी नौकरी की संभावनाओं को बेहतर बनाने और देश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए शिक्षा का एक अनिवार्य पहलू बन गया है.

टॅग्स :एजुकेशनशिक्षा मंत्रालयEducation Department of RajasthanEducation Department
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