दिल्ली में अरुणाचल प्रदेश की तीन लड़कियों के साथ एक दम्पति ने जो शाब्दिक दुर्व्यवहार किया है, उसकी जितनी निंदा की जाए वह कम है. मामला बहुत छोटा सा था. एसी लगाने के दौरान कुछ धूल नीचे की मंजिल पर रहने वाले दम्पति की गैलरी में गिर गई. धूल की सफाई हो सकती थी और मामला वहीं खत्म भी हो सकता था लेकिन उस दम्पति ने तीनों लड़कियों को लेकर जो नस्लीय टिप्पणी की, वह खुद उसके लिए ही आत्मघाती साबित हुआ है. दम्पति के खिलाफ पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है और दम्पति फरार है. दुर्व्यवहार का वीडियो मौजूद है और दम्पति को जेल की हवा खानी पड़ सकती है.
इस मामले में दो विचारणीय मुद्दे हैं. पहला तो यह कि कुछ लोग दूसरे राज्यों और खासकर पूर्वोत्तर भारत के नागरिकों को अलग दृष्टि से क्यों देखते हैं? चेहरे-मोहरे को लेकर धारणा बना लेना निश्चित ही अनुचित है. मगर सच्चाई यह है कि दिल्ली में इस तरह की हरकतें पहले भी होती रही हैं. जो लोग पूर्वोत्तर भारत के राज्यों के सामाजिक जनजीवन से परिचित हैं,
वे जानते हैं कि वहां के लोग आमतौर पर शांति पसंद करने वाले लोग हैं. खासकर अरुणाचल प्रदेश के लोग तो इतने भोले-भाले हैं कि उनके जैसा पूरा देश हो जाए तो सामाजिक विषमताओं के लिए जगह बने ही नहीं. उस प्रदेश की लड़कियां यूपीएससी की परीक्षा के लिए दिल्ली में रह रही हों तो उनकी हौसला अफजाई होनी चाहिए.
उनके साथ दुर्व्यवहार की कोई कैसे सोच सकता है? उस दम्पति ने लड़कियों पर यह भी आरोप लगाया कि वो शराब पीती हैं. लड़कियां वीडियो में कह रही हैं कि वो शराब नहीं पीतीं. वो दम्पति से पूछ रही हैं कि क्या कमरे में शराब की बोतल मिली है? मगर साफ दिख रहा है कि दम्पति क्रोध की चरम अवस्था में हैं.
जहां तक शराब का सवाल है तो लोग यह क्यों मान लेते हैं कि लड़कियां यदि अकेली रह रही हैं तो शराब पी रही होंगी और उनका आचरण ठीक नहीं होगा? और दिल्ली में शराब पीना कोई अपराध तो है नहीं! कुल मिलाकर उस दम्पति का व्यवहार दकियानूसी सोच से प्रभावित नजर आ रहा है. इस मामले में दूसरा मुद्दा यह है कि लोग छोटी-छोटी बातों पर इतना गुस्सा क्यों हो जाते हैं?
उनकी जुबान क्यों आग उगलने लगती है? एक कहावत है कि म्यान से निकली तलवार तो वापस हो सकती है लेकिन जुबान से निकले शब्द वापस नहीं होते. उस दम्पति की जुबान ने उसे संकटपूर्ण स्थिति में डाल दिया है. कानून से बचने के लिए वो फरार हैं लेकिन कितने दिनों तक फरार रहेंगे?
कानून के हाथ लंबे होते हैं और इस मामले में सजा भी हो सकती है! यानी दम्पति की जुबान ने उसके लिए संकटपूर्ण स्थिति पैदा कर दी है. इसलिए बड़े-बुजुर्ग सही कहते हैं कि अपनी जुबान पर लगाम रखो तो बहुत सारे संकट पास नहीं फटकेंगे. दुर्भाग्य की बात है कि सामाजिक जनजीवन में क्रोध बढ़ता जा रहा है.