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जीरो वेस्ट की राह दिखाता टिलोस द्वीप

By देवेंद्र | Updated: February 23, 2026 05:51 IST

घरों, व्यवसायों और पर्यटकों द्वारा अलग‑अलग किए गए कचरे को दर‑दर घर से इकट्ठा किया जाता है और केंद्रीय सर्कुलर इनोवेशन सेंटर में लाया जाता है, जहां इसे 15 से अधिक श्रेणियों में अलग किया जाता है.

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ठळक मुद्देद्वीप ने सारे कूड़ा ढेर और सार्वजनिक कचरा डिब्बे हटा दिए हैं.जैविक, पुनर्चक्रण योग्य और अवशिष्ट में अलग करते हैं.ऊर्जा आवश्यकताओं को भी नवीकरणीय ऊर्जा से पूरा करना शुरू कर दिया है.

ग्रीस का टिलोस द्वीप पहले से ही अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता था, लेकिन अब वह अपने पर्यावरणीय सुधार के कारण वैश्विक ध्यान आकर्षित कर रहा है. दिसंबर 2021 में शुरू हुए ‘जस्ट गो जीरो टिलोस’ कार्यक्रम ने इस छोटे से एगियन द्वीप को दुनिया का पहला जीरो‑वेस्ट प्रमाणित द्वीप बना दिया है. पिछले कुछ वर्षों में टिलोस ने कचरा प्रबंधन की पूरी पद्धति बदल दी है. पहले यहां लगभग 87 से 90 प्रतिशत कचरा लैंडफिल में जाता था, लेकिन अब 100 प्रतिशत कचरा पुनर्चक्रण और कम्पोस्टिंग की प्रक्रिया में जाता है. द्वीप ने सारे कूड़ा ढेर और सार्वजनिक कचरा डिब्बे हटा दिए हैं.

घरों, व्यवसायों और पर्यटकों द्वारा अलग‑अलग किए गए कचरे को दर‑दर घर से इकट्ठा किया जाता है और केंद्रीय सर्कुलर इनोवेशन सेंटर में लाया जाता है, जहां इसे 15 से अधिक श्रेणियों में अलग किया जाता है. टिलोस की सफलता में स्थानीय समुदाय की भागीदारी का बड़ा हाथ है. हर निवासी और व्यावसायिक प्रतिष्ठान कचरे को जैविक, पुनर्चक्रण योग्य और अवशिष्ट में अलग करते हैं.

इसके लिए उन्हें विशेष बैग और संग्रहण तालिका दी जाती है, जिससे उनके योगदान का ट्रैक रखा जाता है. इन कदमों के कारण द्वीप की पुनर्चक्रण दर 90 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई है और जैविक कचरे को कम्पोस्ट करके मिट्टी उर्वरक में बदल दिया जाता है जो स्थानीय कृषि में इस्तेमाल होता है. इसके अलावा द्वीप ने अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को भी नवीकरणीय ऊर्जा से पूरा करना शुरू कर दिया है,

जिससे उसकी कार्बन फुटप्रिंट और ऊर्जा लागत दोनों में कमी आई है. इस मॉडल को यूरोपीय स्तर पर भी मान्यता मिली है और इसे 2024 में यूरोपीय उद्यमिता प्रचार पुरस्कार में ‘सतत संक्रमण का समर्थन’ श्रेणी में प्रथम पुरस्कार और ग्रैंड जूरी पुरस्कार मिला. टिलोस मॉडल यह स्पष्ट करता है कि सफल जीरो‑वेस्ट सिस्टम सिर्फ कचरा अलग करने से अधिक है.

यह संस्कृति, शिक्षा, तकनीक और सामुदायिक भागीदारी का सम्मिलित परिणाम है. द्वीप ने पुरानी लैंडफिल साइट को ही एक अभिनव सर्कुलर इनोवेशन सेंटर में बदल दिया, जहां से अधिकांश सामग्री या तो पुनर्चक्रण, पुन: उपयोग या ऊर्जा में परिवर्तित होती है. भारत जैसे देश के लिए टिलोस का अनुभव बेहद महत्वपूर्ण सबक है. भारत में बड़े शहरों और कस्बों में कचरा प्रबंधन आज भी चुनौतीपूर्ण है.

अगर यहां भी समुदाय, प्रशासन और व्यवसाय एकजुट होकर छोटे‑छोटे कदम उठाएं - जैसे घरों में कचरा अलग करना, पुनर्चक्रण केंद्र स्थापित करना और कम्पोस्टिंग को बढ़ावा देना. यह न केवल कचरा संकट को कम कर सकता है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसर भी बढ़ा सकता है.  

टॅग्स :GreeceHealth and Family Welfare Department
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