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New Income Tax Bill: प्रभावी कर व्यवस्था से बढ़ेगी आर्थिक रफ्तार?, आयकर संग्रह में तेजी

By डॉ जयंती लाल भण्डारी | Updated: March 1, 2025 05:37 IST

New Income Tax Bill: एक अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए आयकर कानून की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर होगी कि इस कानून को कितने कारगर तरीके से लागू किया जाता है.

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ठळक मुद्देएक अप्रैल 2026 से मौजूदा आयकर कानून 1961 की जगह ले लेगा.देश के 140 करोड़ से अधिक लोगों में से सिर्फ 8.09 करोड़ लोगों ने आयकर रिटर्न दाखिल किए.4.90 करोड़ लोगों ने शून्य कर योग्य आय की सूचना दी. सिर्फ 3.19 करोड़ लोगों ने ही आयकर दिया है.

New Income Tax Bill: हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के द्वारा लोकसभा में पेश किया गया नया आयकर विधेयक भारत की आयकर व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता के साथ-साथ राजस्व बढ़ाने के लिए एक बड़ी कोशिश का अहम हिस्सा है. वित्त मंत्री सीतारमण ने पिछले वर्ष जुलाई 2024 के बजट भाषण में कहा था कि मौजूदा आयकर कानून की कई धाराएं अपनी प्रासंगिकता खो चुकी हैं. ये धाराएं विशेष आर्थिक क्षेत्र, दूरसंचार, पूंजीगत लाभ सहित कर छूट एवं कटौती जैसे मामलों में कारगर नहीं रह गई हैं. साथ ही इसके तहत कानूनी जटिलताएं, कर अनुपालन में मुश्किलें और मुकदमेबाजी में लगातार वृद्धि हुई है. ऐसे में नया आयकर विधेयक कानून बनने के बाद आयकर कानून 2025 के रूप में एक अप्रैल 2026 से मौजूदा आयकर कानून 1961 की जगह ले लेगा.

विभिन्न प्रयासों से पिछले 10 वर्षों में आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या और आयकर संग्रह में तेज वृद्धि देखी गई है. लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में उद्योग-कारोबार सेक्टर में कार्यरत रहते हुए कमाई करने वाले, महंगी आरामदायक व विलासिता की वस्तुओं का उपयोग करने वाले तथा पर्यटन के लिए विदेश यात्राएं करने वालों में से भी बड़ी संख्या में लोग या तो आयकर न देने का प्रयास करते हैं या फिर बहुत कम आयकर देते हैं. स्थिति यह है कि वर्ष 2023-24 में देश के 140 करोड़ से अधिक लोगों में से सिर्फ 8.09 करोड़ लोगों ने आयकर रिटर्न दाखिल किए.

इनमें से भी 4.90 करोड़ लोगों ने शून्य कर योग्य आय की सूचना दी. सिर्फ 3.19 करोड़ लोगों ने ही आयकर दिया है. ऐसे में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में आयकर का योगदान बहुत कम बना हुआ है. दुनिया की कई छोटी-छोटी अर्थव्यवस्थाओं में संग्रहित किए जाने वाले आयकर का उनकी जीडीपी में बड़ा योगदान है.

वस्तुतः कर संग्रह में तेज वृद्धि से बुनियादी ढांचे, सामाजिक सेवाओं और जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए सरकार की क्षमता बढ़ती है. सरकार की मुट्ठियों में बढ़ता कर राजस्व न केवल अर्थव्यवस्था के नवनिर्माण में मदद करता है बल्कि यह सरकार को अपने करदाताओं के प्रति जवाबदेह भी बनाता है. साथ ही यह वित्तीय वर्ष की बेहतर योजना और बजट बनाने में मदद करता है.

खासतौर से इस समय जब वर्ष 2047 में देश को विकसित देश बनाने का लक्ष्य रखा गया है, तब जीडीपी में आयकर का योगदान बढ़ाया जाना जरूरी दिखाई दे रहा है. एक अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए आयकर कानून की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर होगी कि इस कानून को कितने कारगर तरीके से लागू किया जाता है. इस कानून की वास्तविक परीक्षा यह भी होगी कि यह कर संबंधी मुकदमों में कितनी कमी लाएगा.

टॅग्स :आयकरनिर्मला सीतारमणनरेंद्र मोदीआयकर विभाग
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