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टैरिफ की चुनौतियों के बीच बढ़ती अर्थव्यवस्था, जीडीपी 7.4 फीसदी की दर से बढ़ने की उम्मीद

By डॉ जयंती लाल भण्डारी | Updated: January 9, 2026 05:48 IST

वित्तीय वर्ष के मजबूत आर्थिक आधारों से आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बेहतर आर्थिक संभावनाएं उभरकर दिखाई दे रही हैं.

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ठळक मुद्देपिछले वित्त वर्ष 2024-25 में जीडीपी की वृद्धि दर 6.5 फीसदी रही थी. सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 7.4 फीसदी की दर से बढ़ने की उम्मीद जताई गई है.2026-27 में भारत की विकास दर 7.5 फीसदी के ऊंचे स्तर पर पहुंचते हुए दिखाई दे सकेगी.

यह कोई छोटी बात नहीं है कि अमेरिका के 50 फीसदी टैरिफ और घटते वैश्विक व्यापार के बीच भारत की अर्थव्यवस्था अनुमान से अधिक बढ़ने की प्रवृत्ति दिखा रही है. 7 जनवरी को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ओर से जारी वित्त वर्ष 2025-26 के अग्रिम अनुमान में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 7.4 फीसदी की दर से बढ़ने की उम्मीद जताई गई है. पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में जीडीपी की वृद्धि दर 6.5 फीसदी रही थी. उल्लेखनीय है कि इस वित्तीय वर्ष के मजबूत आर्थिक आधारों से आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बेहतर आर्थिक संभावनाएं उभरकर दिखाई दे रही हैं.

एक्सिस बैंक के मुताबिक आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में भारत की विकास दर 7.5 फीसदी के ऊंचे स्तर पर पहुंचते हुए दिखाई दे सकेगी. वैश्विक निवेश फर्म इन्वेसको के मुताबिक 2026-27 में भी भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में रेखांकित होते हुए दिखाई देगा. खासतौर से वर्ष 2026 में घरेलू बाजार की मजबूती भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए लाभप्रद होगी.

वर्ष 2026 में भारत का घरेलू बाजार 10 फीसदी से अधिक की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ेगा और इस तेज गति से वर्ष 2030 तक भारत का घरेलू बाजार लगभग 237 अरब डॉलर की ऊंचाई पर पहुंच सकता है. वर्ष 2026 में महंगाई घटने, टैक्स सुधार और ब्याज दर में कमी से घरेलू बाजार को रफ्तार से बढ़ने के आधार मिलेंगे.

जिस तरह नए ऐतिहासिक वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) सुधारों के तहत 5 फीसदी और 18 फीसदी स्लैब वाले दो-स्तरीय जीएसटी स्लैब को लागू किया गया है, उसका लाभ वर्ष 2026 से उभरकर दिखने लगेगा. इसके साथ ही एक अप्रैल 2026 से लागू किया जाने वाला नया इनकम टैक्स कानून महज कुछ धाराओं के बदलाव ही नहीं, बल्कि पूरी टैक्स व्यवस्था के कायापलट के साथ अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाएगा.

इससे मध्यम वर्ग के लोगों की क्रय शक्ति बढ़ेगी. उल्लेखनीय है कि हाल ही में 6 जनवरी को प्रकाशित आईआईएफएल कैपिटल की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) वर्ष 2026 में ब्याज दरों में 0.50 प्रतिशत की और कटौती कर सकता है. साथ ही कच्चे तेल की कीमतें भी कम हो सकती हैं.

इसी तरह एसबीआई रिसर्च की हालिया रिपोर्ट के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों के जून 2026 तक 50 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंचने का अनुमान है. ब्याज दर घटने के कारण सस्ते कर्ज से वर्ष 2026 में आर्थिक गतिविधियों में तेजी की संभावना विकास दर को बढ़ाने के लिए सकारात्मक संदेश होगी.

उम्मीद करें कि ट्रम्प की टैरिफ चुनौतियों के बीच  चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अनुमानित हुई 7.4 फीसदी वृद्धि दर के बेहतर आधारों से आगामी वित्त वर्ष 2026-27 में देश में विभिन्न आर्थिक अनुकूलताएं दिखाई देंगी. देश में महंगाई कम रहेगी, सर्विस सेक्टर निर्माण और विनिर्माण गतिविधियां मजबूत होंगी,

निजी क्षेत्र की बैलेंस शीट दमदार रहेगी, डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत होगा और कर सुधार व ब्याज दर में कटौती से विकास दर को रफ्तार मिलेगी. ऐसे में उम्मीद करें कि वित्त वर्ष 2026-27 में अर्थव्यवस्था की तेज गति के साथ आम आदमी की आमदनी और मुस्कुराहट भी बढ़ते हुए दिखाई देगी.    

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