मुंबई बैठक में पारित प्रस्ताव में बड़ी सावधानी से कहा गया है कि जहां तक संभव होगा, हम अगला चुनाव मिल कर लड़ेंगे। संकेत है कि टीमएमसी-लेफ्ट के बीच तल्ख टकराववाले पश्चिम बंगाल तथा कांग्रेस- लेफ्ट के बीच ही सत्ता संघर्षवाले केरल में ‘इंडिया’ के घटक दलों ...
भारत के चुनाव आयोग की विश्व भर में प्रतिष्ठा है पर देश में उसकी साख पर सवालिया निशान लगते रहे हैं। ताजा प्रकरण चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से जुड़ा है। ...
संसदीय लोकतंत्र में दो ही पक्ष होते हैं: सत्तापक्ष और विपक्ष, और दोनों की सकारात्मक भूमिका से ही संसद चल सकती है, पर जब-जब संसदीय गतिरोध पर सवाल उठते हैं, दोनों एक-दूसरे पर उंगलियां उठाने लगते हैं. ...
अगर घटक दलों की संख्या शक्ति का पैमाना है तो बाजी सत्तारूढ़ भाजपा के हाथ मानी जा सकती है, जो अपने गठबंधन ( एनडीए ) का कुनबा, उसके रजत जयंती वर्ष में 38 तक पहुंचाने में सफल रही। ...
मुकेश सहनी की वीआईपी, उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी और जीतन राम मांझी के हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा को एनडीए में लाने की तैयारी हो चुकी है. एलजेपी का पशुपति नाथ पारस गुट एनडीए में है, अब चिराग पासवान गुट को भी लाने की तैयारी है। ...
राष्ट्रीय राजनीति की बात करें तो दो ही दीर्घजीवी और सफल गठबंधन रहे हैं: भाजपानीत एनडीए और कांग्रेसनीत यूपीए। यह एनडीए का रजत जयंती वर्ष है तो मोदी सरकार को तीसरे कार्यकाल से वंचित करने के लिए अब विपक्ष नया गठबंधन बनाने में जुटा है। ...
ऐसे में विचार या बहस का मुद्दा संप्रदाय और सत्ता-राजनीति से परे व्यापक राष्ट्रहित होना चाहिए। स्वाभाविक ही अलग-अलग समुदाय के लिए अलग-अलग कानून से जटिलताएं पैदा होती हैं। न्याय प्रक्रिया में भी विलंब होता है। सच यह भी है कि न सिर्फ अमेरिका जैसे देश मे ...