पुलिस के खुफिया तंत्र को क्या हो गया है...?

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: April 16, 2026 07:40 IST2026-04-16T07:39:49+5:302026-04-16T07:40:31+5:30

संभव है कि कागजों पर ऐसा तंत्र मौजूद हो लेकिन हकीकत यह है कि जमीन पर ऐसा तंत्र दिखाई नहीं दे रहा है.

What has happened to the police intelligence system | पुलिस के खुफिया तंत्र को क्या हो गया है...?

पुलिस के खुफिया तंत्र को क्या हो गया है...?

पुलिस का यह तर्क बिल्कुल स्वीकार्य है कि हर व्यक्ति की रक्षा के लिए हर वक्त पुलिस मौजूद नहीं रह सकती. लोगों को अपना और अपने आसपास का ध्यान सतर्कता के साथ रखना चाहिए. मगर पुलिस प्रशासन से यह सवाल तो पूछा ही जाना चाहिए कि उसके खुफिया तंत्र को क्या हो गया है? बड़ी-बड़ी घटनाओं को अपराधी अंजाम दे देते हैं, नशे की महफिल सजा लेते हैं और ऐसे आयोजनों की पुलिस को भनक तक नहीं लगती?

खुफिया तंत्र पुलिस की कार्यप्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण तत्व है. पुलिस हर इलाके में ऐसे खबरी तैयार करती है जो उसे समय से पहले या फिर कम से कम समय पर तो आगाह कर ही सकते हैं. ऐसे हजारों उदाहरण मिल जाएंगे जब किसी खबरी से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने बड़े हादसे या यूं कहें कि अपराधों को होने से रोका है. मगर अब यह धारणा बनने लगी है कि पुलिस का खुफिया तंत्र कहीं न कहीं या तो कमजोर हो गया है या फिर सुस्त हो गया है. अभी-अभी मुंबई के गोरेगांव इलाके में एक म्यूजिक कॉन्सर्ट का आयोजन किया गया. मुंबई में या फिर बड़े शहरों में म्यूजिक कॉन्सर्ट कोई बड़ी बात नहीं होती.

मगर गोरेगांव के इस कॉन्सर्ट में खुल कर शराब और ड्रग्स का सेवन किया गया और नतीजा यह हुआ कि दो छात्रों की ड्रग्स के ओवरडोज से मौत हो गई. एक लड़की अभी भी अस्पताल में जीवन के लिए संघर्ष कर रही है. उसने पुलिस को बताया कि ड्रग्स लेने के बाद उसे कुछ भी होश नहीं रहा. इस मामले में अभी तक छह लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है जिसमें वह युवक भी शामिल है जिसने ड्रग्स की आपूर्ति की थी. उसके पास से ड्रग्स के कुछ टैबलेट्स जब्त भी किए गए हैं.

प्रारंभिक रूप से कहा जा रहा हैै कि ये ड्रग्स मुंबई के बाहर से लाया गया था. सवाल है कि कहां से? अभी इसका जवाब नहीं मिला है लेकिन यह सवाल भी पूछा जाना चाहिए कि पुलिस का इतना बड़ा अमला होने और एंटी ड्रग्स फोर्स की मौजूदगी के बाद भी ड्रग्स मुंबई कैसे पहुंच रहा है? क्या यह बात किसी से छिपी हुई है कि न केवल मुंबई बल्कि महाराष्ट्र के ज्यादातर शहरों में ड्रग्स बड़ी आसानी से उपलब्ध हो जाता है!

कई शहरों में रेलवे स्टेशन के आसपास का इलाका ड्रग्स के धंधे का बड़ा केंद्र बना हुआ है. सवाल है कि क्या सुनियोजित रूप से ऐसे स्थानों पर पुलिस शिकंजा कसती है? क्या ऐसा कोई तंत्र पुलिस ने विकसित किया है ताकि यह पता चल सके कि स्कूल-कॉलेजों में ड्रग्स की पुड़िया कहां से पहुंच रही है और उसे कैसे रोका जाए? संभव है कि कागजों पर ऐसा तंत्र मौजूद हो लेकिन हकीकत यह है कि जमीन पर ऐसा तंत्र दिखाई नहीं दे रहा है. ड्रग्स के सौदागर बेलगाम हो रहे हैं. हमारे युवा मौत के मुंह में जा रहे हैं. उन्हें बचाना जरूरी है. हमारा महाराष्ट्र कहीं उड़ता पंजाब न बन जाए!

Web Title: What has happened to the police intelligence system

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