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कोविड-19 महामारी का कारण बने सार्स-कोव-2 की उत्पत्ति का पता लगाने में क्यों हो रही इतनी देरी?

By भाषा | Updated: August 27, 2021 12:30 IST

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(डोमिनिक ड्वेयर, डायरेक्टर ऑफ पब्लिक हेल्थ पैथोलॉजी, एनएसडब्ल्यू हेल्थ पैथोलॉजी, वेस्टमेड हॉस्पिटल एंड यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी, यूनिविर्सिटी ऑफ सिडनी) सिडनी, 27 अगस्त (द कन्वरसेशन) सार्स-कोव-2 वायरस ने बीते सौ साल में सबसे बड़ी महामारी कोविड-19 को जन्म दिया है, जिसने पूरी दुनिया की स्वास्थ्य व्यवस्था, अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन को पटरी से उतार दिया। 2019 के अंतिम दिनों में जो हुआ उसे जानने और वायरस से भविष्य में होनी महामारी की तैयारी के लिए इसकी उत्पत्ति को समझना महत्वपूर्ण है। ऐसे विषयों के अध्ययन में समय लगता है। साथ ही इसके लिये योजना और सहयोग की आवश्यकता होती है। इनको राजनीति या कल्पना के आधार पर नहीं बल्कि विज्ञान के जरिये अंजाम दिया जाता है। सार्स-कोव-2 की उत्पत्ति की पड़ताल में पहले ही बहुत समय लग चुका है। चीन के वुहान में 20 महीने से अधिक समय पहले दिसंबर 2019 में कोरोना वायरस संक्रमण का पहला मामला सामने आया था। मीडिया के अनुसार, इस सप्ताह अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने कोविड-19 के लिये जिम्मेदार वायरस की उत्पत्ति के बारे में की गई अपनी पड़ताल से राष्ट्रपति जो बाइडन को अवगत कराया है। अगले कुछ दिनों में जांच रिपोर्ट के कुछ हिस्सों को सार्वजनिक रूप से जारी किए जाने की उम्मीद है।‘दि न्यूयॉर्क टाइम्स’ की एक प्रारंभिक रिपोर्ट बताती है कि जांच में यह नहीं पता चल पाया कि यह वायरस किसी प्रयोगशाला से निकला या फिर जानवरों से मनुष्यों में फैला। लिहाजा वायरस की उत्पत्ति कैसे हुई, इसके बारे में कुछ ठोस सामने नहीं आया है। ऐसे में जैसे-जैसे समय बीतता जाएगा, विशेषज्ञों के लिए वायरस की जैविक उत्पत्ति का निर्धारण करना उतना ही कम संभव होता जाएगा। मैं उन विशेषज्ञों में से एक था, जिन्होंने इस साल की शुरुआत में सार्स-कोव-2 की उत्पत्ति का पता लगाने के लिये विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम के साथ वुहान का दौरा किया था। हमने पाया कि वायरस की उत्पत्ति जूनोटिक ट्रांसमिशन यानी संक्रमण के जानवरों से मनुष्यों में फैलने से हुई। हमारी जांच मार्च के बारे में मार्च में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई। इससे आगे की जांच का रास्ता साफ हुआ। इन सिफारिशों का समर्थन करने के लिए अध्ययन की रूपरेखा तैयार करने की तत्काल आवश्यकता है। मैंने और डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अन्य स्वतंत्र लेखकों ने इस काम में तेजी लाने का अनुरोध करते हुए एक पत्र लिखा है। इसमें फिलहाल छह महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर जोर देने की बात कही गई है: 1. महामारी की शुरुआत में सामने आईं रिपोर्टों के आधार पर अध्ययन करना। 2. जिन क्षेत्रों में शुरुआती कोविड-19 मामले सामने आए, वहां सार्स-कोव-2 विशिष्ट एंटीबॉडी सर्वेक्षण करना। यह इसलिये भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इटली, फ्रांस, स्पेन और ब्रिटेन सहित कई देशों ने अक्सर शुरुआती कोविड​​​-19 का पता लगाने के साक्ष्यों के बारे में जानकारी दी है। 3. वुहान के बाजारों में जानवरों की आपूर्ति करने वाले वन्यजीव फार्मों से जुड़े लोगों का पता लगाना और सामुदायिक सर्वेक्षण करना। 4. वायरस फैलाने वाले संभावित जानवरों पर सर्वेक्षण, जिनमें चमगादड़ और अन्य जानवर शामिल हैं। 5. जिन क्षेत्रों में शुरुआती मामले सामने आए, वहां विस्तृत विश्लेषण करना। 6. नए विश्वसनीय रूझानों पर अध्ययन करना। इनमें से कुछ अध्ययनों की जैविक व्यवहार्यता समय पर निर्भर है। सार्स-कोव-2 एंटीबॉडी किसी के संक्रमित होने और वायरस से उबरने के एक हफ्ते बाद या टीका लगने के पश्चात सामने आते हैं। लेकिन हम जानते हैं कि एंटीबॉडी समय के साथ कम हो जाती हैं - इसलिए दिसंबर 2019 से पहले या उसके आसपास संक्रमित लोगों से अब एकत्र किए गए नमूनों की सटीक जांच करना कठिन हो सकता है। सामान्य आबादी में टीकाकरण, प्राकृतिक संक्रमण, या यहां तक ​​कि दूसरे संक्रमण (खासकर अगर 2019 में प्रारंभिक संक्रमण हुआ हो) के बीच अंतर करने के लिए एंटीबॉडी अध्ययन का उपयोग करना भी समस्याग्रस्त है। सार्स-कोव-2 विशिष्ट एंटीबॉडी का पता लगाने के लिए उपयोग की जाने वाली प्रयोगशाला विधियों के बारे में अंतरराष्ट्रीय सहमति की भी आवश्यकता है। परीक्षण विधियों में असंगति ने कई स्थानों से डेटा गुणवत्ता पर सवाल खड़े किये हैं। हमारी मार्च रिपोर्ट के बाद से नए सबूत सामने आए हैं। इन दस्तावेजों और डब्ल्यूएचओ डेटा रिपोर्ट की समीक्षा डब्ल्यूएचओ से स्वतंत्र वैज्ञानिकों ने की है। वे डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के समान निष्कर्ष पर पहुंचे हैं। उनका मानना है:-सार्स-कोव-2 की उत्पत्ति के बारे में जानकारी नहीं मिली है।-चीन (या कहीं और) प्रमुख प्रजातियों का परीक्षण नहीं किया गया है।-और जानवरों से इसकी उत्पत्ति के बारे में पर्याप्त वैज्ञानिक सबूत हैं। प्रयोगशाला से वायरस के रिसाव की संभावना को पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता, लेकिन वन्यजीव व्यापार में नियमित रूप से होने वाले मानव-पशु संपर्क को देखते हुए इसकी अत्यधिक संभावना नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भविष्य में वायरस की उत्पत्ति के अध्ययन की निगरानी के लिए एक नयी समिति के गठन का आह्वान किया है। यह प्रशंसनीय है, लेकिन पहले से मौजूद सार्स-कोव-2 उत्पत्ति अध्ययनों के लिए आवश्यक योजना में और देरी करने का जोखिमपूर्ण है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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