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अमेरिका ने चीन पर बोला हमला, पंचेन लामा कहां हैं, विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ की टिप्पणी 25वीं बरसी के अवसर पर आई है

By भाषा | Updated: May 19, 2020 17:05 IST

कोरोना वायरस के बाद अमेरिका ने चीन पर एक और हमला बोल दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने चाइना से पूछा है कि 11वें पंचेन लामा कहां हैं। 17 मई को लापता होने की 25वीं बरसी मनाई गई थी।

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ठळक मुद्देअमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि उनका विभाग धार्मिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने और इसके संरक्षण को प्राथमिकता देता है।चीन के मामले में जहां सभी धर्मों के लोगों को गंभीर दमन और भेदभाव का सामना करना पड़ता है।

वाशिंगटनः अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने चीन से कहा है कि उसे तत्काल यह सार्वजनिक करना चाहिए कि पंचेन लामा कहां हैं और साथ ही धार्मिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने की अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का पालन करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पंचेन लामा तिब्बती बौद्ध धर्म की सर्वाधिक महत्वपूर्ण हस्तियों में से एक हैं जिनका स्थान आध्यात्मिक प्राधिकार के रूप में दलाई लामा के बाद दूसरे नंबर पर है। पोम्पिओ की टिप्पणी 11वें पंचेन लामा के लापता होने की 25वीं बरसी के अवसर पर आई है।

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि उनका विभाग धार्मिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने और इसके संरक्षण को प्राथमिकता देता है, विशेषकर चीन के मामले में जहां सभी धर्मों के लोगों को गंभीर दमन और भेदभाव का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘इस मिशन के तहत हमने 17 मई को 11वें पंचेन लामा, गेधुन चोइक्यी न्यिमा के लापता होने की 25वीं बरसी मनाई जो 1995 में छह साल की उम्र में चीन सरकार द्वारा अपहृत किए जाने के बाद से सार्वजनिक तौर पर नहीं दिखे हैं।’’

पोम्पिओ ने कहा, ‘‘पंचेन लामा तिब्बती बौद्ध धर्म में सर्वाधिक महत्वपूर्ण हस्तियों में से एक हैं जो दलाई लामा के बाद दूसरे नंबर का आध्यात्मिक प्राधिकार हैं। लेकिन चीन द्वारा पंचेन लामा का उत्पीड़न किया जाना असामान्य नहीं है।’’ उन्होंने चीन सरकार से कहा कि वह तत्काल यह सार्वजनिक करे कि पंचेन लामा कहां हैं और उसे सभी लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का पालन करना चाहिए।

तिब्बती बालक गेधुन चोइक्यी न्यिमा को 1995 में 11वें पंचेन लामा के रूप में मान्यता दी गई थी, जो तिब्बती बौद्ध धर्म में दलाई लामा के बाद दूसरा सर्वोच्च आध्यात्मिक प्राधिकार है। लेकिन कुछ दिन बाद न्यिमा लापता हो गए और विश्व के सबसे कम उम्र के राजनीतिक बंदी बन गए।

तिब्बत को अपना हिस्सा बताने वाले चीन ने 11वें पंचेन लामा के रूप में एक अन्य बालक ज्ञाल्तसेन नोर्बू को मान्यता दी, लेकिन भारत में स्थित तिब्बती संसद ‘कशाग’ न्यिमा को ही लगातार 11वां पंचेन लामा मानती चली आ रही है। तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा भारत के धर्मशाला शहर में रहते हैं और यहीं से ‘निर्वासन में तिब्बत सरकार’ नाम से केंद्रीय तिब्बत प्रशासन काम करता है।

 

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