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अमेरिकन कांग्रेस कमेटी ने भारत को नाटो प्लस का सदस्य बनाने की उठाई मांग, पीएम मोदी के दौरे से पहले की सिफारिश

By भाषा | Updated: May 27, 2023 15:10 IST

पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा से पहले अमेरिकी कांग्रेस की एक शक्तिशाली समिति ने ‘नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) प्लस’ में भारत को शामिल करने की सिफारिश की है।

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ठळक मुद्देचीन को घेरने के लिए अमेरिका को भारत का साथ चाहिएअमेरिकी कांग्रेस की एक शक्तिशाली समिति ने ‘नाटो प्लस’ में भारत को शामिल करने की सिफारिश कीभारत को इसमें शामिल करने से खुफिया जानकारी निर्बाध तरीके से साझा हो पाएगी

नई दिल्ली: राष्ट्रपति जो बाइडेन के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 जून को अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे। भारत और अमेरिका की दोस्ती अब चीन के लिए चिंता का सबब हो सकती है। चीन को दक्षिण-चीन सागर से लेकर ताइवान व हिंद-प्रशांत महासागर में घेरने के लिए अमेरिका को भारत का साथ चाहिए। 

यही वजह है कि पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा से पहले अमेरिकी कांग्रेस की एक शक्तिशाली समिति ने ‘नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) प्लस’ में भारत को शामिल करने की सिफारिश की है। नाटो प्लस (अभी नाटो प्लस 5) एक सुरक्षा व्यवस्था है जो नाटो और पांच गठबंधन राष्ट्रों ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जापान, इजराइल और दक्षिण कोरिया को वैश्विक रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए साथ लाती है।

भारत को इसमें शामिल करने से इन देशों के बीच खुफिया जानकारी निर्बाध तरीके से साझा हो पाएगी और भारत की बिना किसी समय अंतराल के आधुनिक सैन्य प्रौद्योगिकी तक पहुंच बन सकेगी। अमेरिका और चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के बीच सामरिक प्रतिस्पर्धा संबंधी सदन की चयन समिति ने भारत को शामिल कर नाटो प्लस को मजबूत बनाने समेत ताइवान की प्रतिरोध क्षमता बढ़ाने के लिए एक नीति प्रस्ताव पारित कर दिया। इस समिति की अगुवाई अध्यक्ष माइक गालाघर और रैंकिंग सदस्य राजा कृष्णमूर्ति ने की।

चयन समिति ने कहा, "चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के साथ सामरिक प्रतिस्पर्धा जीतने और ताइवान की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका को हमारे सहयोगियों और भारत समेत सुरक्षा साझेदारों के साथ संबंध मजबूत करने की आवश्यकता है। नाटो प्लस में भारत को शामिल करने से हिंद प्रशात क्षेत्र में सीसीपी की आक्रामकता को रोकने और वैश्विक सुरक्षा मजबूत करने में अमेरिका तथा भारत की करीबी साझेदारी बढ़ेगी।"

पिछले छह साल से इस प्रस्ताव पर काम कर रहे भारतीय-अमेरिकी रमेश कपूर ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। उन्होंने उम्मीद जतायी कि इस सिफारिश को राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकार कानून 2024 में जगह मिलेगी और अंतत: यह कानून बन जाएगा। समिति ने कहा कि जैसे हम युद्ध लड़ने के लिए संयुक्त आकस्मिक योजना बनाते हैं, वैसे ही हमें शांतिकाल में अमेरिकी सहयोगियों के साथ समन्वय करने की आवश्यकता है।

टॅग्स :नरेंद्र मोदीअमेरिकाजो बाइडनचीनNATO
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