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बादाम-अखरोट के सहारे गिलहरी के व्यवहार का किया गया अध्ययन

By भाषा | Updated: August 8, 2021 16:06 IST

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(लुसिया एफ जैकब, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्केले : नथानियल हंट यूनिवर्सिटी ऑफ नेब्रास्का ओमाहा और रॉबर्ट जे फुल, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्केले)

बर्केले/नेब्रास्का (अमेरिका), आठ अगस्त (द कन्वरसेशन) पेड़ों पर उछल-कूद करने वाली गिलहरियां जीव-जंतु जगत में ओलंपिक के तैराक की तरह होती हैं। इंसानों की तरह ही किसी गिलहरी की सफलता के लिए शारीरिक शक्ति और मानसिक अनुकूलन क्षमता दोनों की आवश्यकता होती है।

जैकब्स लैब ने बर्कले परिसर में गिलहरी की प्रजातियों पर अध्ययन किया है। गिलहरी की दो प्रजातियां - ईस्टर्न ग्रे (साइउरस कैरोलिनेंसिस) और लोमड़ी की तरह दिखने वाली गिलहरी (साइउरस नाइजर) परिसर में उछल कूद करते हुए दिखती हैं। इंसानी स्वभाव के बारे में भी वे काफी कुछ बयां करती हैं। वे संवेदी संकेतों का उपयोग करती हैं।

हाल में इस संबंध में एक अध्ययन प्रकाशित हुआ है। गिलहरी छलांग लगाती है और बिना गिरे जमीन पर उतरती है। आखिर यह सब कैसे होता है? यह अध्ययन चुनौतीपूर्ण वातावरण में निर्णय लेने, सीखने और व्यवहार की भूमिकाओं को लेकर नया दृष्टिकोण प्रदान करता है।

किसी गिलहरी का जीवन लोगों को सरल लग सकता है कि पेड़ों पर चढ़ना-उतरना, खाना, सोना और इस क्रिया को लगातार दोहराना, लेकिन इसमें सूक्ष्म रूप से विकसित संज्ञानात्मक कौशल भी शामिल हैं। गिलहरी पतझड़ में छह से आठ सप्ताह की अवधि के दौरान सर्दियों के लिए अखरोट, बादाम जैसे ज्यादा ऊर्जा प्रदान करने वाले खाद्य पदार्थों को छिपाकर रखती हैं और कभी-कभी महीनों तक उन्हें इसका ठिकाना याद रहता है। इसमें भी बड़े आकार के बादाम को वह अपने हिसाब से काफी सुरक्षित स्थान पर रखती हैं।

शोध के दौरान देखा गया कि लोमड़ी की तरह दिखने वाली गिलहरियों ने अपने-अपने रहने के स्थान के आसपास बादाम-अखरोट को छिपाकर रखा। लेकिन बड़े आकार के बादाम से उन्हें ज्यादा कैलोरी मिलती है, इसलिए उन्होंने इसे ज्यादा सुरक्षित स्थानों पर रखा। यह उनके निर्णय लेने की क्षमता को दिखाती है। सर्दियों के मौसम के दौरान खाद्य पदार्थों की कमी से निपटने के लिए गिलहरियां ऐसा करती हैं।

शोध के दौरान गिलहरी के व्यवहार में आने वाले बदलाव को भी समझा गया। एक पेड़ से दूसरे पेड़ या एक शाखा से दूसरी शाखा पर छलांग लगाते समय गिलहरियां दूरी का भी अनुमान लगाती हैं। इसके लिए वह यह भी निर्णय करती हैं कि कहां से छलांग लगाना ज्यादा ठीक रहेगा। लचीली शाखाओं के बजाए वे सीधी शाखाओं से आने-जाने को ज्यादा तरजीह देती हैं।

गिलहरियों के उल्लेखनीय करतबों के बारे में विश्लेषण हमें यह समझने में मदद कर सकता है कि ऐसे मनुष्यों की मदद कैसे की जा सकती है जिन्हें चलने-फिरने या अन्य दिक्कतें आती हैं। इस तरह के प्रयास खोज और बचाव प्रयासों में सहायता कर सकता है और जहरीले रसायन जैसे विनाशकारी पर्यावरणीय खतरों का तेजी से पता लगा सकता है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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