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पाकिस्तान में सिख समुदाय पर मंडरा रहा खतरा, रिपोर्ट में हुआ खुलासा

By मनाली रस्तोगी | Updated: September 12, 2022 13:25 IST

ग्लोबल स्ट्रैट व्यू के अनुसार, खैबर पख्तूनख्वा में एक युवा सिख लड़की दीना कौर के अपहरण, बलात्कार और जबरन धर्म परिवर्तन और शादी की घटना ने देश में अल्पसंख्यक की सही स्थिति का खुलासा किया है; 8 सितंबर को खैबर पख्तूनख्वा के बुनेर जिले में एक प्रदर्शन में, सिख समुदाय के प्रतिनिधियों और पाकिस्तान पंचायत के संगठनों ने सीधे वैश्विक सिख समुदाय से 'हमारी बेटी की रिहाई के लिए उनसे जुड़ने की अपील की।

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ठळक मुद्देगुरपतवंत सिंह पन्नून ने पहले कहा था कि अल्पसंख्यक समुदाय पाकिस्तान में खुशी से रह रहा है। अक्टूबर 2021 में पाकिस्तान की एक संसदीय समिति ने अल्पसंख्यकों को जबरन धर्मांतरण से बचाने के लिए एक प्रस्तावित विधेयक को खारिज कर दिया था।सिख समुदाय की भावनाओं को आहत करते हुए पाकिस्तान में स्थानीय प्रशासन उनके पूजा स्थलों को अपवित्र कर रहा है और उन पर अवैध रूप से कब्जा कर रहा है।

इस्लामाबाद: पाकिस्तान में सिख समुदाय के खिलाफ अत्याचार के बढ़ते मामलों ने सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) के संस्थापक गुरपतवंत सिंह पन्नून के झूठे दावे को उजागर कर दिया है। ग्लोबल स्ट्रैट व्यू के अनुसार, खैबर पख्तूनख्वा में एक युवा सिख लड़की दीना कौर के अपहरण, बलात्कार और जबरन धर्म परिवर्तन और शादी की घटना ने देश में अल्पसंख्यक की सही स्थिति का खुलासा किया है।

गुरपतवंत सिंह पन्नून ने पहले कहा था कि अल्पसंख्यक समुदाय पाकिस्तान में खुशी से रह रहा है। ग्लोबल स्ट्रैट व्यू के एक सवाल कि क्या एसएफजे खालिस्तान जनमत संग्रह में पाकिस्तान के सिख समुदाय को शामिल करेगा का जवाब देते हुए कहा था कि 20,000 या 25,000 सिख हैं जो खुशी से रह रहे हैं और वे पाकिस्तान को अपना घर कहते हैं।

इस बीच 8 सितंबर को खैबर पख्तूनख्वा के बुनेर जिले में एक प्रदर्शन में सिख समुदाय के प्रतिनिधियों और पाकिस्तान पंचायत के संगठनों ने सीधे वैश्विक सिख समुदाय से 'हमारी बेटी की रिहाई' के लिए उनसे जुड़ने की अपील की। ग्लोबल स्ट्रैट व्यू के अनुसार USCIRF की 2022 की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया, "अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन, बलात्कार, और जबरन विवाह धार्मिक अल्पसंख्यक महिलाओं और बच्चों, विशेष रूप से ईसाई, हिंदू और सिख धर्मों के लिए आसन्न खतरे बने रहे।"

अक्टूबर 2021 में पाकिस्तान की एक संसदीय समिति ने अल्पसंख्यकों को जबरन धर्मांतरण से बचाने के लिए एक प्रस्तावित विधेयक को खारिज कर दिया था। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि पाकिस्तान सरकार देश में केवल कुछ गुरुद्वारे बनाकर सिखों और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को गुमराह कर रही है, जबकि ऐतिहासिक महत्व की सैकड़ों ऐसी संरचनाएं हैं जिन्हें बर्बाद और अपवित्र किया जा रहा है। 

सिख समुदाय की भावनाओं को आहत करते हुए पाकिस्तान में स्थानीय प्रशासन उनके पूजा स्थलों को अपवित्र कर रहा है और उन पर अवैध रूप से कब्जा कर रहा है। स्थानीय अधिकारियों द्वारा पाकिस्तान में गुरुद्वारों की खुलेआम उपेक्षा की जा रही है। कई गुरुद्वारों की हालत खस्ता है। सिख समुदाय ने आरोप लगाया है कि इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETBP) और पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (PSGPC) को सिख धार्मिक भावनाओं का कोई सम्मान नहीं है। 

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