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पाकिस्तान: 1250 रुपये में 10 किलो आटा, खाद्य तेल 620 रुपये लीटर, फिर भी विशेषज्ञ बोले- सबसे बुरा दौर अभी आना बाकी है

By शिवेंद्र राय | Updated: February 17, 2023 17:01 IST

कर्ज पाने के लिए पाकिस्तान ने आईएमएफ की कड़ी शर्तों को पूरा करने का निर्णय लिया है। इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों में टैक्स की दर को बढ़ाने के प्रस्ताव दिए गए हैं जिससे स्थिति और भी बुरी हो सकती है।

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ठळक मुद्देपाकिस्तान में 1250 रुपये में बिक रहा है 10 किलो आटारसोई में इस्तेमाल होने वाला खाद्य तेल 620 रुपये लीटर बिक रहा हैएक किलो चना दाल की कीमत 430 रुपये हो गई है

नई दिल्ली: दिवालिया होने की कगार पर पहुंचे पाकिस्‍तान में महंगाई चरम पर है। हालत ऐसे हैं कि खाने पीने की सामान्य वस्तुओं के दाम भी आसमान छू रहे हैं। पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतें बढ़ कर 272 रुपये प्रति लीटर पर जा पहुंची हैं। 10 किलो आटे के बैग की कीमत 1250 रुपये हो गई हौ तो वहीं रोज रसोई में इस्तेमाल होने वाला खाद्य तेल 620 रुपये लीटर बिक रहा है।

एक किलो चना दाल की कीमत 430 रुपये हो गई है। सामान्य चायपत्ती जहां 1700 रुपये किलो बिक रही वहीं बाजार में प्याज है ही नहीं। जहां थोड़ी बहुत प्याज मिल भी रही है वहां कीमत 300 रुपये प्रति किलो है। जनता जहां महंगाई की मार से लाचार है वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि आर्थिक बदहाली का शिकार पाकिस्तान की मुसीबतें अभी लंबी चलेंगी।

पाकिस्तान के डॉन समाचार पत्र में आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ फैसल बारी ने लिखा है कि ये तो बुरा दौर है लेकिन बदतर आना अभी बाकी है। बता दें कि फैसल बारी पाकिस्तान में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर हैं। अपने कॉलम में उन्होंने लिखा है, "लोगों को यह समझना होगा कि सबसे बुरा दौर अभी आना बाकी है और यह कुछ वर्षों तक जारी रह सकता है। जिनके पास आय के कई स्त्रोत नहीं हैं, जिनके पास मुद्रास्फीति को मात देने वाली योजनाओं में बचत या निवेश नहीं है, उनके समय आने वाला समय और कठिन होगा। जीवन स्तर को काफी हद तक नीचे लाना होगा आने वाले कई वर्षों तक देश के अधिकांश लोगों के लिए यही स्थिति बनी रहेगी।"

फैसल बारी आगे लिखते हैं, असली समस्या यह है कि ज्यादातर लोग पहले से ही केवल आवश्यक चीजों पर ही खर्च कर पाते थे। आज जरूरी चीजों में भी कटौती करनी पड़ेगी। लोगों को पुनर्विचार करना होगा कि वे कितनी बार बाहर खाएंगे या क्या खाएंगे। शिक्षा और स्वास्थ्य पर कितना और कब खर्च करना है। क्या बच्चों को सस्ते या सरकारी स्कूलों में स्थानांतरित करने की आवश्यकता है या अधिक कठिन परिस्थितियों में अपने बच्चे को स्कूल से पूरी तरह निकालने लेने की आवश्यकता है। यहा तक कि जरूरी चिकित्सा और विवाह भी स्थगित करने पड़ेंगे।

बता दें कि कर्ज पाने के लिए पाकिस्तान ने आईएमएफ की कड़ी शर्तों को पूरा करने का निर्णय लिया है। इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों में टैक्स की दर को बढ़ाने के प्रस्ताव दिए गए हैं जिससे स्थिति और भी बुरी हो सकती है।

टॅग्स :पाकिस्तानशहबाज शरीफInternational Monetary Fundइमरान खान
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