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Nobel Prize 2020: अमेरिका के पॉल आर मिल्ग्रॉम और रॉबर्ट बी विल्सन को अर्थशास्त्र का नोबेल

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: October 12, 2020 18:09 IST

अर्थशास्त्र में मिला नोबेल पुरस्कारः घोषणा ऐसे वक्त हुई, जब कोरोना वायरस महामारी के प्रभाव के चलते दुनिया द्वितीय विश्व युद्ध के बाद मंदी के सबसे बुरे दौर का अनुभव कर रही है। इस पुरस्कार की घोषणा के साथ ही नोबेल परस्कार सप्ताह का समापन हो गया।

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ठळक मुद्देमैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के दो शोधकर्ताओं और हॉर्वर्ड विश्वविद्यालय के एक शोधकर्ता को दिया गया था।नोबेल पुरस्कार के तहत एक करोड़ क्रोना (करीब 11 लाख अमेरिकी डॉलर) की रकम प्रदान की जाती है।तकनीकी रूप से इसे ‘स्वीरिजेज रिक्सबैंक प्राइज इन इकोनॉमिक साइंसेज इन मेमोरी ऑफ अल्फ्रेड नोबेल’ के तौर पर जाना जाता है।

स्टाकहोमः अमेरिका के पॉल आर मिल्ग्रॉम और रॉबर्ट बी विल्सन को ऑक्शन थ्योरी में सुधार के लिये अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार दिया जाएगा। यह घोषणा ऐसे वक्त हुई, जब कोरोना वायरस महामारी के प्रभाव के चलते दुनिया द्वितीय विश्व युद्ध के बाद मंदी के सबसे बुरे दौर का अनुभव कर रही है। इस पुरस्कार की घोषणा के साथ ही नोबेल परस्कार सप्ताह का समापन हो गया।

पिछले साल वैश्विक गरीबी दूर करने की दिशा में शोध के लिये यह पुरस्कार मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के दो शोधकर्ताओं और हॉर्वर्ड विश्वविद्यालय के एक शोधकर्ता को दिया गया था। इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के तहत एक करोड़ क्रोना (करीब 11 लाख अमेरिकी डॉलर) की रकम प्रदान की जाती है।

अमेरिका के पॉल आर मिल्ग्रॉम तथा रॉबर्ट बी विल्सन को इस साल का अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार दिया गया है। उन्हें यह पुरस्कार ‘नीलामी सिद्धांत में सुधार और नए नीलामी स्वरूप के आविष्कार’ के लिए दिया गया है। रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज के महासचिव गोरान हैंसन ने सोमवार को स्टॉकहोम में अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार विजेताओं के नाम की घोषणा की।

अर्थशास्त्र के क्षेत्र में यह पुरस्कार ऐसे समय दिया गया है जब विश्व कोविड-19 महामारी की वजह से द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद सर्वाधिक भीषण मंदी का सामना कर रहा है। अर्थशास्त्र के क्षेत्र में दिए जाने वाले इस पुरस्कार को तकनीकी रूप से ‘स्वीरिजेज रिक्सबैंक प्राइज’ कहा जाता है और यह वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में दिया जाता है।

इस पुरस्कार की स्थापना 1969 में हुई थी और इसे अब नोबेल पुरस्कारों में से ही एक माना जाता है। पिछले साल यह पुरस्कार वैश्विक गरीबी को कम करने के प्रयासों के लिए मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के दो अनुसंधानकर्ताओं तथा हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक अनुसंधानकर्ता को दिया गया था। पुरस्कार के तहत एक स्वर्ण पदक और एक करोड़ स्वीडिश क्रोना (लगभग 8.27 करोड़ रुपये) की राशि दी जाती है।

टॅग्स :नोबेल पुरस्कारइकॉनोमीकोरोना वायरसअमेरिकासंयुक्त राष्ट्रवर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन
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