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पाकिस्तान सेना पर भीषण आत्मघाती हमला, 9 सैनिकों की मौत, 20 घायल, टीटीपी ने ली जिम्मेदारी

By शिवेन्द्र कुमार राय | Updated: September 1, 2023 10:26 IST

खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू जिले में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के एक आत्मघाती हमलावर ने एक सुरक्षा काफिले को निशाना बनाया, जिसमें नौ सैनिकों की मौत हो गई और 20 अन्य घायल हो गए।

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ठळक मुद्देपाकिस्तान का उत्तर पश्चिमी क्षेत्र भीषण आतंकी हमले से दहल गयानौ सैनिकों की मौत हो गई और 20 अन्य घायल हो गएखैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू जिले में हुआ आतंकी हमला

पेशावर: गुरूवार, 31 अगस्त को पाकिस्तान का उत्तर पश्चिमी क्षेत्र भीषण आतंकी हमले से दहल गया। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू जिले में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबानपाकिस्तान (टीटीपी) के एक आत्मघाती हमलावर ने एक सुरक्षा काफिले को निशाना बनाया, जिसमें नौ सैनिकों की मौत हो गई और 20 अन्य घायल हो गए। 

ये जानकारी पाक  सेना की मीडिया शाखा ‘इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशन’ ने दी। आईएसपीआर ने बताया कि बाइक सवार आत्मघाती हमलावर ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू जिले में काफिले को अपना निशाना बनाया।

बयान के मुताबिक, हमलावर ने अपनी बाइक काफिले में शामिल बलों के वाहनों से टकरा दी, जिसमें नौ सैनिकों की मौत हो गई और 20 सैनिक घायल हो गए। प्रतिबंधित टीटीपी ने हमले की जिम्मेदारी ली है। हमले के तुरंत बाद सेना, पुलिस और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। सेना ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है। 

 बयान के मुताबिक, हमले के अपराधियों को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया है। पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवारुल हक काकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर हमले की निंदा की। उन्होंने इस तरह के कृत्यों को पूरी तरह से निंदनीय बताया और कहा कि उनकी संवेदनाएं मारे गए व घायलों के परिवारों के साथ हैं।

बता दें कि ये पहली बार नहीं है जब खैबर पख्तूनख्वा में पाक सेना पर आतंकी हमला हुआ हो। अफगानिस्तान की सीमा से लगे पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत का एक बड़ा हिस्सा लंबे समय से अशांत है। इस इलाके में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) का मजबूत बेस है। हाल ही में बीते 20 अगस्त को भी अशांत उत्तरी वजीरिस्तान आदिवासी जिले में एक आतंकवादी हमले में कम से कम 11 मजदूर मारे गए थे। 

इस इलाके में  अलगाववादी संगठन बलूच लिब्रेशन आर्मी की मौजूदगी भी है जो क्षेत्र में चीनी गतिविधियों और अरबों डॉलर की लागत वाले 'चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे' (सीपीईसी) के विरोध में है। कुछ समय पहले इस संगठन ने चीनी इंजिनियरों पर हमला किया था। पिछले कुछ सालों से बलोचिस्तान के अलगाववागी संगठन पाकिस्तान की सेना के लिए सिरदर्द बन गए हैं। सीपीईसी की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान ने सेना की दो अलग डीविजन भी बनाई हैं जिनमें लगभग 30 हजार सैनिक हैं। पाकिस्तान बदहाली में भी हर महीने लगभग 1 करोड़ रुपये इसकी सुरक्षा के लिए खर्च करता है। हालाकि फिर भी पाक सेना असहाय नजर आती है।

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