तोक्यो, 13 अगस्त (एपी) जापान के रक्षा मंत्री ने शुक्रवार को तोक्यो में एक युद्ध स्मारक का दौरा किया, जिसे चीन और दोनों कोरियाई देश जापान के आक्रमण के प्रतीक के तौर पर देखते हैं। वह युद्ध में शहीद लोगों के लिए प्रार्थना करने गए थे। कुछ दिनों के बाद द्वितीय विश्वयुद्ध में देश की पराजय की 76वीं बरसी है।
बीसवीं सदी के प्रथमार्द्ध में जापान की कार्रवाई के पीड़ित और खासतौर पर कोरियाई देश तथा चीन स्मारक को जापान के बल प्रयोग के प्रतीक के रूप में देखते हैं क्योंकि यह दोषी युद्ध अपराधियों का सम्मान करता है।
पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे के छोटे भाई और रक्षा मंत्री नोबुओ किशी ने कहा, ‘‘ युद्ध में मरने वालों को सम्मान देना सभी देशों में सामान्य बात है।’’ किशी युद्ध के समय अत्याचार से इंकार करते रहे हैं।
किशी ने कहा, ‘‘मैं उन लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जो देश के लिए लड़े और अंतिम युद्ध में जिन्होंने अपनी जान गंवाई।’’
वह तोमोई इनादा के बाद पहले रक्षा मंत्री हैं, जिन्होंने यासुकुनी का दौरा किया है। इनादा ने दिसंबर 2016 में इस युद्ध स्मारक का दौरा किया था।
आबे ने 2013 में इस स्मारक का दौरा किया था, जिसका चीन और कोरियाई देशों ने विरोध किया था, जिसके बाद सात वर्षों तक वह यहां नहीं गए लेकिन पिछले वर्ष प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद वह नियमित रूप से यहां जाते हैं।
प्रधानमंत्री योशीहिदे सुगा ने अप्रैल में यासुकुनी वसंत उत्सव के दौरान धार्मिक आभूषण भेंट किए लेकिन स्मारक पर जाने से बचते रहे।
आर्थिक एवं वित्त नीति मंत्री यासुतोशी निशिमुरा ने शुक्रवार को अलग से स्मारक का दौरा किया।
किशी और निशिमुरा ने कहा कि 15 अगस्त की वर्षगांठ से पहले स्मारक का दौरा किया ताकि भीड़ से बच सकें और उन्होंने शांतिपूर्वक प्रार्थना की।
दक्षिण कोरिया और चीन, स्मारक पर जापानी नेताओं के जाने का विरोध करते हैं। कोरियाई प्रायद्वीप पर 1910 से 1945 तक जापान के औपनिवेशिक शासन को लेकर कई कोरियाई नागरिकों में क्षोभ है।
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