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मालदीव में मौजूद भारतीय सैनिकों को 10 मई तक 'बदलेगा' भारत, हेलिकॉप्टर और डोर्नियर विमान मालदीव में ही रहेंगे

By शिवेन्द्र कुमार राय | Updated: February 3, 2024 11:43 IST

भारत मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की लगातार मांग को मानते हुए अपने सैन्य कर्मियों को वापस लेने पर सहमत हो गया है, लेकिन इस बात पर कोई स्पष्टता नहीं है कि कर्मचारियों की जगह कौन लेगा।

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ठळक मुद्देमालदीव में मौजूद भारतीय सैनिकों को 10 मई तक 'बदलेगा' भारतहेलिकॉप्टर और डोर्नियर विमान मालदीव में ही रहेंगेभारत और मालदीव की उच्च स्तरीय कोर ग्रुप की बैठक हुई

नई दिल्ली: मालदीव में मौजूद भारतीय सैनिकों को वहां से हटाने से संबंधित मुइज्जू सरकार के आदेश को लेकर भारत और मालदीव की उच्च स्तरीय कोर ग्रुप की बैठक शुक्रवार, 2 फरवरी को दिल्ली में हुई। इस बैठक में तय हुआ कि भारत भारत 10 मई तक संचालन और रखरखाव कार्य में शामिल अपने सैन्य कर्मियों को बदल देगा। हालांकि मालदीव भारतीय विमानन प्लेटफार्मों- दो नौसैनिक हेलिकॉप्टर और एक डोर्नियर विमान की सेवाएं बरकरार रखेगा। 

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार मालदीव ने इस बैठक के संबंध में कहा है कि भारत 10 मार्च तक प्लेटफार्मों में से एक में अपने सैन्य कर्मियों को बदलने के लिए सहमत हो गया है। सेवा दे रही शेष दो इकाइयों को 10 मई तक बदल दिया जाएगा। हालांकि भारतीय पक्ष ने केवल यह कहा कि दोनों पक्ष भारतीय विमानन प्लेटफार्मों के निरंतर संचालन के लिए पारस्परिक रूप से व्यावहारिक समाधान के लिए सहमत हुए हैं।

इसका प्रभावी अर्थ यह है कि भारत मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की लगातार मांग को मानते हुए अपने सैन्य कर्मियों को वापस लेने पर सहमत हो गया है, लेकिन इस बात पर कोई स्पष्टता नहीं है कि कर्मचारियों की जगह कौन लेगा। भारतीय सरकार ने इसकी पुष्टि नहीं की है कि क्या ये भारतीय नागरिक होंगे, जिनमें शायद पूर्व सैनिक भी शामिल होंगे या कोई और। ये प्लेटफ़ॉर्म (दो नौसैनिक हेलिकॉप्टर और एक डोर्नियर विमान) मालदीववासियों को मानवीय और मेडवैक सेवाएं प्रदान करते हैं।

बता दें कि मुइज्जू ने पहले चेतावनी दी थी कि मालदीव की धरती पर किसी भी रूप में भारतीय सेना की मौजूदगी उनके देश में लोकतंत्र के लिए हानिकारक होगी। उन्होंने भारत से कहा था कि भारतीय सेना की वापसी मालदीव के लोगों की लोकतांत्रिक इच्छा थी। हालाँकि, भारत चाहता था कि माले उन हेलिकॉप्टरों और विमानों को अपने पास रखे, जिन्होंने हिंद महासागर द्वीपसमूह में चिकित्सा निकासी के माध्यम से 500 से अधिक लोगों की जान बचाई है। 

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