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Google Doodle: समलैंगिक एक्टिविस्ट फ्रैंक कामेनी पर गूगल का खास डूडल, जिसने अमेरिकी सरकार को झुकने पर किया था मजूबर

By दीप्ती कुमारी | Updated: June 2, 2021 09:12 IST

गूगल ने 2 जून के अपने डूडल से अमेरिकी समलैंगिक अधिकार कार्यकर्ता फ्रेंड कामेनी को याद किया है। उन्हें अमेरिका में समलैंगिक अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले व्यक्ति के रूप में जाना जाता है।

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ठळक मुद्देगूगल डूडल ने अमेरिका के समलैंगिक अधिकार कार्यकर्ता को किया यादकामेनी अमेरिका में समलैंगिक अधिकारों की वकालत करने वाले पहले कुछ कार्यकर्ताओं में शामिल थेकामेनी का उनका निधन साल 2011 में 86 वर्ष की आयु में हो गया था

मुंबई: गूगल ने आज का डूडल फ्रैंक कामेनी को समर्पित किया है। अमेरिका में खगोलशास्त्री के तौर पर काम कर चुके फ्रैंक की बड़ी पहचान समलैंगिक अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले कार्यकर्ता के तौर पर रही है। इनका पूरा नाम फ्रैंकलिन एडवर्ड कामेनी था। इनका जन्म 21 मई 1925 को अमेरिका के न्यूयॉर्क में हुआ था। 

अमेरिका में अपने करियर के शुरुआती वर्षों में समलैंगिक होने के चलते उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया था।हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और सरकार के इस फैसले के खिलाफ अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। यही नहीं, 1960 के दशक में पहली बार समलैंगिक अधिकार के समर्थन में अमेरिका में प्रदर्शन आयोजित कराने में अहम भूमिका निभाई।

Google Doodle: 'प्राइड मंथ' में फ्रैंक कामेनी पर डूडल

गूगल आज फ्रेंड कामेनी की उपलब्धियों का जश्न मना रहा है। दरअसल, इसके पीछे भी खास वजह है। जून का महीना शुरू हो चुका है। पूरी दुनिया में समलैंगिक अधिकारों का समर्थन करने वाले लोग इसे 'प्राइड मंथ' (Pride Month) के तौर पर मनाते रहे हैं। इसे एक तरह से कथित 'सामाजिक कलंक' के उलट गर्व के तौर पर मनाने की परंपरा है। 

इस पूरे महीने समलैंगिक अधिकारों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता कई तरह के आयोजन करते हैं और अपनी बात रखते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन भी इस बार जून के महीने को प्राइड मंथ के तौर पर मनाने की घोषणा कर चुके हैं।

Google Doodle: फ्रैंक कामेनी की जिंदगी का सफर

फ्रैंकलिन एडवर्ड कामेनी ने 15 साल की छोटी उम्र में भौतिकी का अध्ययन करने के लिए क्वींस कॉलेज में दाखिला लिया। इस दौरान  उन्होंने यूरोप में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सेना में सेवा की । सेना छोड़ने के बाद क्वींस कॉलेज लौट आए और 1948 में भौतिकी में स्नातक की उपाधि प्राप्त की ।

बाद में फ्रैंक कामेनी  ने हावर्ड विश्वविद्यालय से खगोल विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की । उन्होंने खगोल विज्ञान में मास्टर डिग्री (1949) और डॉक्टरेट (1956) दोनों के साथ स्नातक किया । उनकी डॉक्टरेट थीसिस का शीर्षक था- फोटोइलेक्ट्रिक स्टडी ऑफ सम आरवी टौरी और येलो सेमिरेगुलर वेरिएब्लस । साथ ही उन्होंने  जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय  के खगोल विज्ञान विभाग में एक साल तक पढ़ाया ।

 1957 में फ्रैंक कामेनी  ने आर्मी मैप सर्विस  के साथ अमेरिका सरकार के खगोल शास्त्री के रूप में नौकरी स्वीकार कर ली लेकिन उनकी समलैंगिकता के कारण कुछ महीने में निकाल दिया गया । उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में नौकरी से निकाले जाने के बाद गुहार लगाई और 1960 में व्हाइट हाउस के बाहर  समलैंगिक  अधिकारों के लिए विरोध प्रदर्शन का  आयोजन किया । यह अमेरिका का पहला समलैंगिक विरोध प्रदर्शन था । उसके बाद 1965 में फ्रैंक कामेनी और अन्य 10 लोगों ने व्हाइट हाउस के सामने औऱ बाद में पेंटागन में समलैंगिक अधिकारों को लिए विरोध किया ।  

70 के दशक की शुरुआत में उन्होंने अमेरिकन साइकियाट्रिक  एसोसिएशन के समलैंगिकता को  मानसिक विकार के रूप में वर्गीकरण को सफलतापूर्वक चुनौती दी और 1975 में सिविल सेवा आयोग ने अंततः एलजीबीटीक्यू कर्मचारियों पर लगाए  प्रतिबंधों को हटा दिया ।

1971 में कामेनी अमेरिकी कांग्रेस के लिए पहली बार खुले तौर पर समलैंगिक उम्मीदवार बने ,  जब वे गैर-मतदान कांग्रेस प्रतिनिधि के लिए कोलंबिया जिले के पहले चुनाव में भाग लिया ।

कामेनी को उनके जीवन के अंतिम वर्षों में एक समलैंगिक अधिकार कार्यकर्ता के रूप में उनके काम के लिए व्यापक रूप से पहचाना गया था  । 2009 में अपनी बर्खास्तगी के 50 वर्षों से अधिक समय बाद कामेनी से अमेरिकी सरकार ने औपचारिक रूप से  माफी मांगी ।  जून 2010 में वॉशिंगटन डीसी ने उनके सम्मान में ड्यूपॉन्ट सर्कल के पास 17 वीं स्ट्रीट एनडब्ल्यू के एक खंड का नाम 'फ्रैंक कामेनी वे' रखा ।  फ्रैंक कामेनी का 2011 में 86 वर्ष की आयु में निधन हो गया ।

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