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डेविड जूलियस व आर्डम पातापुतियन को मिला चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार

By भाषा | Updated: October 4, 2021 17:44 IST

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स्टॉकहोम, चार अक्टूबर (एपी) इस वर्ष का चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार अमेरिकी वैज्ञानिकों डेविड जूलियस और आर्डम पातापुतियन को दिए जाने की घोषणा की गयी है। उन्हें तापमान और स्पर्श के लिए ‘रिसेप्टर’ की खोज के लिए यह सम्मान दिया गया है। इन ‘रिसेप्टर’ से इंसान तापमान और स्पर्श को महसूस करता है।

दोनों वैज्ञानिकों का अध्ययन ‘सोमैटोसेंसेशन’ क्षेत्र पर केंद्रित था जो आंख, कान और त्वचा जैसे विशेष अंगों की क्षमता से संबंधित है।

नोबेल समिति के महासचिव थॉमस पर्लमैन ने सोमवार को इन विजेताओं के नामों की घोषणा की। उन्होंने कहा, ‘‘इससे वास्तव में प्रकृति के रहस्यों में से एक का खुलासा होता है... यह वास्तव में ऐसा कुछ है जो हमारे अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए यह एक बहुत ही अहम और गहन खोज है।"

समिति ने कहा कि जूलियस (65) ने तंत्रिका सेंसर की पहचान करने के लिए मिर्च के घटक कैप्साइसिन का इस्तेमाल किया। तंत्रिका सेंसर से त्वचा पर तापमान की प्रतिक्रिया होती है। उसने कहा कि पातापुतियन ने कोशिकाओं में अलग दबाव-संवेदनशील सेंसर का पता लगाया।

पिछले साल इसी जोड़ी को ‘न्यूरोसाइंस’ के लिए प्रतिष्ठित कवली पुरस्कार दिया गया था।

नोबेल समिति के पैट्रिक अर्नफोर्स ने कहा, "कल्पना कीजिए कि आप गर्मी के मौसम में किसी दिन सुबह मैदान में नंगे पांव चल रहे हैं... आप सूरज की गर्मी, सुबह की ओस की ठंडक, हवा और अपने पैरों के नीचे घास को महसूस कर सकते हैं। तापमान, स्पर्श और हरकत के ये प्रभाव सोमैटोसेंसेशन पर निर्भर भावनाएं हैं।"

उन्होंने कहा, "त्वचा और अन्य गहरे ऊतकों से इस तरह की सूचना लगातार निकलती है और हमें बाहरी और आंतरिक दुनिया से जोड़ती है। यह उन कार्यों के लिए भी आवश्यक है, जिन्हें हम सहजता से और बिना ज्यादा सोचे-समझे करते हैं।”

पर्लमैन ने कहा कि उन्होंने पुरस्कारों की घोषणा से पहले दोनों विजेताओं से बातचीत की थी। उन्होंने कहा, ‘‘उनसे बातचीत करने के लिए मेरे पास कुछ मिनट ही थे... वे काफी खुश थे और शायद कुछ हैरान भी।’’

पिछले साल का पुरस्कार तीन वैज्ञानिकों को दिया गया था, जिन्होंने लीवर को खराब करने वाले हेपेटाइटिस सी वायरस की खोज की। वह ऐसी कामयाबी थी, जिससे घातक बीमारी के इलाज का रास्ता प्रशस्त हुआ और ब्लड बैंकों के माध्यम से इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए परीक्षण किए गए।

इस प्रतिष्ठित पुरस्कार में एक स्वर्ण पदक और एक करोड़ स्वीडिश क्रोनर (करीब 11.4 लाख अमेरिकी डॉलर) दिए जाते हैं। पुरस्कार की राशि स्वीडिश आविष्कारक अल्फ्रेड नोबेल द्वारा छोड़ी गई वसीयत से दी जाती है। नोबेल का 1895 में निधन हो गया था।

नोबेल पुरस्कार चिकित्सा के अलावा भौतिकी, रसायन विज्ञान, साहित्य, शांति और अर्थशास्त्र जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य के लिए दिए जाते हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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